तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे कैदी चुनावी चक्कर में फंस गए हैं। न्यूनतम निर्धारित सजा पूरी कर चुके एक सौ से अधिक कैदी दिल्ली सरकार के गठन का इंतजार कर रहे हैं।
अक्तूबर में लागू हुई विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के बाद दिल्ली में बनी अरविंद केजरीवाल की सरकार, फिर इस्तीफा और राष्ट्रपति शासन के बाद अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के बीच इन कैदियों की रिहाई लटक गई है।
न्यूनतम सजा काट चुके उम्र कैदियों की रिहाई के लिए बने सेंटेंस रिव्यू बोर्ड की बैठक पिछले 6 महीने से नहीं हुई है।
पहली बार हुआ है ऐसा
तिहाड़ जेल प्रशासन ने बोर्ड की बैठक जल्द कराए जाने को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग को चिट्ठी लिखी है। बोर्ड के अध्यक्ष दिल्ली के मुख्यमंत्री होते हैं।
यह पहला मौका है, जब मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली है और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन है। तिहाड़ के कैदियों ने जेल प्रशासन को चिट्ठी लिखी है। जिसमें कहा है कि अगर दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली है तो उनका क्या कसूर है। उनकी रिहाई पर विचार किया जाना चाहिए।
इस चिट्ठी के बाद जेल प्रशासन ने भी उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखी है। तिहाड़ में सौ के करीब ऐसे कैदी हैं, जिसकी उम्र कैद की सजा चौदह साल पूरी हो गई है। उनकी रिहाई के लिए सेंटेंस रिव्यू बोर्ड की बैठक होनी है। चुनाव के दौरान पैरोल या फर्लों सुविधा नहीं मिलने से भी कैदियों ने अपनी नाराजगी जताई है।
कैदियों को है बैठक का इंतजार
तिहाड़ जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने कहा कि उम्र कैद की सजा पाए कैदियों की चिट्ठी मिलने के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल को जेल प्रशासन की ओर से चिट्ठी भेजी गई है। इन सभी कैदियों को बोर्ड की बैठक का इंतजार है। इस बात का हवाला कैदियों ने अपनी चिट्ठी में दिया है।
सेंटेंस रिव्यू बोर्ड का चेयरमैन दिल्ली का मुख्यमंत्री होता है। प्रिंसपल सेक्रेटरी होम, पुलिस कमिश्नर, चीफ सेशन जज, सचिव कानून, तिहाड़ के डीजी इस बोर्ड के सदस्य होते हैं। बोर्ड ही उम्र कैद की सजा पाए कैदियों की सजा की समीक्षा और रिहाई सुनिश्चित करता है।
साल में चार बार बोर्ड की बैठक होती है, लेकिन पिछले छह महीने से बैठक नहीं हुई। पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव फिर केजरीवाल सरकार का गठन और इस्तीफा। इसके बाद राष्ट्रपति शासन और अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते बैठक नहीं हो रही है।
क्या है कैदियों को छोड़ने की प्रक्रिया
सेंटेंस रिव्यू बोर्ड की बैठक में तिहाड़ जेल प्रशासन की तरफ से मामले रखे जाते हैं। बोर्ड के सदस्य कैदी के चाल चलन और जज ने सजा में क्या कहा है, समेत कई पहलुओं पर चर्चा करते हैं।
बोर्ड किसी कैदी को छोड़ने का फैसला लेता है तो सिफारिश उपराज्यपाल के पास भेजी जाती है। अंतिम फैसला उपराज्यपाल को लेना होता है। अमूमन बोर्ड की बैठक में 25-30 मामले आते हैं, लेकिन इस बार बैठक में देरी के कारण 100 से अधिक मामले हो गए हैं।
तिहाड़ में उम्रकैद की सजा पाए कैदी
पुरुष- 1273, महिला- 59
दस वर्ष से अधिक की सजा पाए कैदी
पुरुष- 331, महिला-1