कैदी अपनी जरूरत की चीजों से हथियार तैयार कर रहे
सीसीटीवी से चप्पे चप्पे की निगरानी की बावजूद आज भी कैदी जेल में अपनी जरूरत की चीजों से हथियार तैयार कर रहे हैं और एक दूसरे पर हमला कर उन्हें मौत की घात उतार रहे हैं। इस साल हमले में एक दर्जन से अधिक कैदी जख्मी हो चुके हैं। तिहाड़ जेल प्रशासन ने ऐसे उपकरण खरीदे हैं, जिसके जरिए वह जमीन में छिपे हथियारों का पता लगा सकते हैं। बावजूद इसके हथियार निर्माण पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
7500 सीसीटीवी कैमरों से हो रही निगरानी
तिहाड़ जेल में 7500 कैमरों की मदद से निगरानी की जा रही है। सभी सीसीटीवी कैमरे तिहाड़ के अलावा मंडोली और रोहिणी जेल में लगे हुए हैं। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए टीम गठित है। टीम 24 घंटे सीसीटीवी के जरिए कैदियों पर निगरानी रखते हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि अभी करीब दो हजार और कैमरे लगाए जाने हैं।
तलाशी अभियान में बरामद किए जाते हैं हथियार
जेल प्रशासन का कहना है कि कुछ दिनों के अंतराल में जेलों में तलाशी अभियान चलाए जाते हैं। इस साल जेल में चलाए गए अभियान के तहत 80 चाकू, 60 सुआ, तीन दर्जन सर्जिकल ब्लेड बरामद किए जा चुके हैं। सर्जिकल ब्लेड को छोड़कर कैदी अपने हाथों से ही जेल में चाकू और सुआ को तैयार करते हैं। जेल सूत्रों का कहना है कि दीवारों में सीलन की वजह से कैदी उसे कुरेद कर उसमें लगे सरिया को निकाल लेते हैं और फिर उससे घातक हथियार तैयार कर लेते हैं। इसके अलावा चम्मच, थाली, ग्रिल की पत्ती व अन्य सामान से हथियार बना लेते हैं।
हाल के महीने में कैदियों पर हुए हमले
- 27 जुलाई 2024 : भाई की हत्या का बदला लेने के लिए जेल नंबर 8/9 में लवली और लवीश नाम के दो भाइयों पर हमला।
- 6 जून 2024 : तिहाड़ जेल में बने अस्पताल में इलाज के दौरान कहासुनी होने पर हितेश नाम के कैदी पर हमला किया गया।
- 3 मई 2024 : जेल नंबर तीन में सेवादार का काम करने वाले शकूरपुर निवासी दीपक नाम के कैदी पर हमला कर उसकी हत्या की।
- 25 अप्रैल 2024 : जेल नंबर तीन में दबदबे के लिए दो कैदी गुट भिड़े, चार कैदी दुर्गेश, दीपक, धीरज और दिनेश घायल हो गए।