राजधानी में ठंड के बीच आम आदमी की थाली से हरी सब्जियां दूर होती
जा रही हैं। दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कोई भी मौसमी सब्जी 40
रुपये प्रति किलो से नीचे नहीं बिक रही है।
टमाटर, प्याज, साग, गोभी, बंद
गोभी, मटर, मेथी और शिमला मिर्च जैसी मौसमी सब्जियों के दाम आसमान पर हैं।
खास बात यह है कि आम आदमी जहां सब्जियों की ऊंची कीमतों से परेशान है,
वहीं दिल्ली सरकार का दावा है कि दाम दिसंबर 2013 की तुलना में इस साल 10
से 31 फीसदी तक कम हैं।
राजधानी समेत एनसीआर
की मंडियों में मौसमी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। सर्दियों में
मंडियां हरी सब्जियों से भर जाती हैं, लेकिन पहली बार दुकानदार महंगे दामों
के चलते कम मात्रा में सब्जियां रख रहे हैं, क्योंकि ग्राहक किलो की बजाय
आधा किलो या एक पाव खरीदने के लिए मजबूर हैं।
दिसंबर तक पहले गरमी और फिर
अचानक ठंड और कोहरे से सब्जियों के दामों में तेजी आई है। मौसम की मार से
फसल खराब होने से दाम बढ़े हैं। सब्जी से जुड़े व्यवसायी टमाटर के दाम में
तेजी आने का मुख्य कारण पाकिस्तान को फसल सप्लाई करना मान रहे हैं।
होल
सेल विक्रेता संजय भगत ने बताया कि दिल्ली के आसपास से बंद गोभी और फूल
गोभी की फसल आती है, लेकिन इस बार दिसंबर में पहले गरम मौसम और फिर अचानक
पाले के कारण फसल खराब हो गई है।
अब दूसरी फसल तैयार होने पर दामों में
थोड़ी कमी आएगी, लेकिन 13 जनवरी को लोहड़ी के बाद शादियों का सीजन शुरू हो
रहा है। इस दौरान मांग अधिक होगी और फसल कम। इसलिए दामों में ज्यादा गिरावट
तो नहीं आएगी, लेकिन कमी जरूर होगी।