सोहना खंड के गांव दौला में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राजकीय उच्चतर विद्यालय तथा ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का तोहफा देंगे। ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट उत्तर भारत का पहला संस्थान होगा, जिसकी आधारशिला शुक्रवार को राष्ट्रपति रखेंगे। राष्ट्रपति द्वारा स्मार्ट ग्राम पहल के तहत इन दोनों परियोजनाओं के शिलान्यास संबंधित शिलालेख का अनावरण रिमोट से किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रपति अंबाला, पलवल और महेन्द्रगढ़ में प्रधानमंत्री कौशल केन्द्रों का ई-उद्घाटन करेंगे और विभिन्न कार्यक्रमों के तहत सफल विद्यार्थियों व प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्रों का वितरण करेंगे।
गुरुग्राम की दोनों परियोजनाओं पर लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च होंगे। राजकीय विद्यालय का निर्माण तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) द्वारा लगभग 3 करोड़ की लागत से करवाया जाएगा। राष्ट्रपति द्वारा गांव दौला में आधारशिला रखे जाने वाला संस्थान भी उत्तर भारत का पहला संस्थान होगा। इसमें राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डीटीआई) खोला जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायत द्वारा निगम को लगभग 7 एकड़ भूमि दी गई है। इसमें से लगभग 3.5 एकड़ भूमि पर यह बनाया जाएगा, बाकी 3.5 एकड़ भूमि पर एनएसडीसी द्वारा मल्टी स्किल ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाएगी। पूरी परियोजना पर लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
एनएसडीसी के स्टेट एंगेजमेंट हेड जयकांत सिंह के अनुसार, इंस्टीट्यूट लगभग 6 महीने में बनकर तैयार होगा। डीटीआई में लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे ट्रैक का निर्माण किया जाएगा और इसमें प्रशिक्षुओं के लिए आवासीय सुविधा भी होगी। इस इंस्टीट्यूट में हैवी और लाइट कमर्शियल वाहनों के अलावा हैवी इक्विपमेंट मशीनरी जैसे जेसीबी, क्रेन आदि चलाने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा चालकों को शिष्टाचार व बोलचाल के तरीके भी सिखाए जाएंगे। इंस्टीट्यूट में जेसीबी व क्रेन आदि चलाने की फॉर्मल ट्रेनिंग को एक कोर्स के रूप में शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। न्यूनतम समय 340 घंटे का रहेगा।
दूसरी ओर विद्यालय के भवन का निर्माण करवाने वाले आर्किटेक्चर प्रशांत शाह के अनुसार, निर्माण की एक विशेष तकनीक एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा तैयार की गई है। इस तकनीक से निर्माण पर सामान्य की अपेक्षा लगभग 25 प्रतिशत लागत कम आती है और यह भवन भूकंप रोधी होगा। इस डिजाइन से निर्माण तेज गति से होता है और इसमें बहुत सारे कुशल श्रमिकों की जरूरत नहीं पड़ती है, कोई भी साधारण व्यक्ति 5-6 दिन में इस तकनीक को सीख सकता है।
इस तकनीक से उत्तर भारत में पहली बार गांव दौला में विद्यालय भवन का निर्माण किया जाएगा। यह विद्यालय भवन एक तल का होगा और इसमें विस्तार की गुंजाइश रखी जाएगी, फिलहाल इसका निर्माण 18000 वर्ग फीट क्षेत्र में किया जाएगा।