फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व पुस्तक मेला: राष्ट्रपति मुर्मू ने किया उद्घाटन, कहा- किताबें पढ़ना सिर्फ शौक नहीं, परिवर्तनकारी अनुभव भी

Sat, 01 Feb 2025 06:38 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रगति मैदान में नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि किताबें पढ़ना सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि एक परिवर्तनकारी अनुभव भी है। 
विज्ञापन
विश्व पुस्तक मेला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को प्रगति मैदान में नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन किया। मेले का आयोजन नेशनल बुक ट्रस्ट की तरफ से किया गया है। वैश्विक भागीदारी के साथ इस बार की थीम 'रिपब्लिक@75' रखी गई है और रूस को फोकस राष्ट्र के रूप में नामित किया गया है।

विज्ञापन


उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि किताबें पढ़ना सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि एक परिवर्तनकारी अनुभव भी है। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों की किताबें पढ़ने से क्षेत्रों व समुदायों के बीच सेतु बनता है। राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि पुस्तक मेले में भारत की विभिन्न भाषाओं समेत अन्य देशों की भाषाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई स्टॉल हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक मेला पुस्तक प्रेमियों को दुनिया भर का साहित्य एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने में सक्षम बनाएगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्कूली बच्चों को पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में निर्धारित किताबें पढ़ने के अलावा विविध विषयों पर विभिन्न प्रकार की किताबें भी पढ़नी चाहिए। कहा कि इससे उन्हें अपनी क्षमताओं को खोजने के साथ-साथ अच्छा इंसान बनने में भी मदद मिलेगी। आगे राष्ट्रपति ने जोर देते हुए सभी से बच्चों के लिए पुस्तकों के निर्माण और प्रचार-प्रसार को विशेष महत्व देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सबसे अच्छी आदतों में से एक जो हम अपने बच्चों में विकसित कर सकते हैं, वह है किताबें पढ़ने का प्यार। प्रत्येक बुजुर्ग को इसे एक महत्वपूर्ण कर्तव्य के रूप में लेने की बात भी कही।

विज्ञापन

मेले में दिव्यांगों के लिए निशुल्क ब्रेल किताबें
पुस्तक मेले में दिव्यांगों के लिए निःशुल्क ब्रेल किताबें भी हैं। इसके लिए उन्हें अपना आईकार्ड दिखाना होगा। दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय व नेशनल बुक ट्रस्ट के सहयोग से शुरू हुए कार्यक्रम में यूआईडी कार्ड वाले दृष्टिबाधित बच्चों को निशुल्क ब्रेल पुस्तकें मिलेंगी। ऐसे दृष्टिबाधित पाठक जिनके पास यूआईडी कार्ड नहीं है, उनके लिए यूआईडी कार्ड पंजीकरण की व्यवस्था की गई है।

 ये हैं मेले की मुख्य विशेषताएं
. 50 से ज्यादा भाग लेने वाले देश।
. 2000 से ज्यादा प्रकाशक और स्टॉल।
. 1000 से ज्यादा वक्ता।
. 600 से ज्यादा साहित्यिक व सांस्कृतिक सत्र।

इस साल क्या है नया, क्या है खास
. थीम मंडप (हॉल 5): इसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद की ओर से डिजाइन किया गया है। यह मंडप दर्शकों को इंस्टॉलेशन, किताबों, वृत्तचित्रों (डॉक्यूमेंट्री) व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये भारत के गणतंत्रीय आदर्शों से रूबरू कराएगा।
. अंतरराष्ट्रीय फोकस मंडप (हॉल 4): यह मंडप विश्व पुस्तक मेले के फोकस देश रूस पर केंद्रित है। 'रूस से आई किताबें' नामक मंडप में रूस की समृद्ध साहित्यिक व सांस्कृतिक विरासत देखने को मिलेगी।
. लेखक कॉर्नर (हॉल 5) व लेखक मंच (हॉल 2): यहां साहित्यिक चर्चाओं में प्रमुख लेखकों, कवियों और अनुवादकों से सीधे रूप से जुड़ने व सुनने का मौका मिलेगा।
. बच्चों का मंडप (हॉल 6): यह कथावाचन, लेखन व अन्य दूसरी रचनात्मक कार्यशालाओं और इंटरैक्टिव गतिविधियों के साथ युवा पाठकों व अभिभावकों की पसंदीदा जगह साबित होगा।
. 'सभी के लिए पुस्तकें' (हॉल 6): यहां नेशनल बुक ट्रस्ट व दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की संयुक्त पहल के तहत ब्रेल पुस्तकों का निशुल्क वितरण होगा।
. प्रकाशन जगत से जुड़े उद्यमियों के लिए व्यावसायिक अवसर: बी-टू-बी जोन व प्रकाशकों को वैश्विक स्तर पर कॉपीराइट्स क्रय-विक्रय के लिए मंच।
. सांस्कृतिक मंच : मेले में गणतंत्र भारत के 75 साल पूरे होने पर भारत की विविधता व विरासत का जश्न भी मनाया जा रहा है। यहां नौ दिनों तक लोग रोजाना सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का लुत्फ उठा सकते हैं। इसी तरह लेखक लाउंज में प्रकाशित लेखकों की प्रदर्शनी। चित्रकारों का कोना में कला के साथ-साथ व्यंग्यात्मक कार्टून के कार्यों की प्रदर्शनी लगेगी।
विज्ञापन

नौ दिन चलेगा मेला
नौ दिनों तक चलने वाले आयोजन में हॉल 2-6 में दुनिया भर से 50 देश हिस्सा ले रहे हैं। 2,000 से अधिक प्रकाशक और प्रदर्शक और विभिन्न राष्ट्रीयताओं व भाषाओं के 1,000 से अधिक वक्ता भी यहां जुड़ेंगे। इस दौरान विद्वान, शिक्षक, बच्चे, लेखक, प्रकाशक और पुस्तक प्रेमी एक छत के नीचे नजर आएंगे। आयोजन का केंद्र पुस्तक, साहित्य और संस्कृति रहेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें