अगर आपको राष्ट्रीय राजधानी के आसपास मिनी इंडिया की झलक देखनी है तो सूरजकुंड मेला परिसर से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।
लगभग 35 एकड़ में फैले इस परिसर में देश की विविधता वाली संस्कृति, प्रकृति, इतिहास और स्थापत्य...सबकुछ देखने को मिलेगा। इसके लिए गेट बनवाए गए हैं।
करीब 11सौ साल पहले तोमर वंश के राजाओं द्वारा बनाया गया सूरजकुंड क्षेत्र अपने आपमें मानव जाति की उत्पत्ति से लेकर आधुनिक भारत के इतिहास को भी समेटे हुए है।
जब पाषाण काल में मानव ने बोली और लिखना भी नहीं सीखा था तब की भीमबेटका गुफाओं से लेकर आधुनिक भारत के गोवा के उल्लासपूर्ण जीवनशैली की झलक भी देखने को मिलेगी।
यही नहीं इस परिसर में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भीम बेटिका की गुफाएं (मध्य प्रदेश), अर्जुन दीवार (महाबलिपुरम, तामिलनाडु) और एलिफेंटा गुफाएं (महाराष्ट्र) की प्रतिकृतियां प्राचीन इतिहास को जीवंत करती दिखाई देती हैं।
कीजिए एशिया के सबसे पुराने अखाड़े के दर्शन
इसी तरह 7वीं शताब्दी में बना त्रिपुरा का उनाकोटी तीर्थ और 16वीं शताब्दी में बनी निजामकालीन स्थापत्य का बेजोड़ नमूना चारमीनार हैदराबाद की याद दिलाती है।
18वीं शताब्दी में बने एशिया के सबसे पुराने अखाड़े रंग घर तक के दर्शन भी यहां होते हैं। 21वीं शताब्दी के प्रारंभ में अस्तिव में आए छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी अपने आपको इस कड़ी में शोकेस करने की कोशिश की है।
उत्तराखंड ने यहां 9वीं शताब्दी में बने बद्रीनाथ धाम की प्रतिकृति तैयार करवाई तो छत्तीसगढ़ इस बार यहां बस्तर की कलाकृतियों की प्रतिकृति बनाने की शुरुआत की है।
अब तक यहां ऐसे 15 स्ट्रक्चर बनाए जा चुके हैं। 16वें का निर्माण छत्तीसगढ़ सरकार करवा रही है। कोशिश यह है कि पर्यटक शिल्पियों के शिल्प और बुनकरों के सामान की खरीदारी के साथ-साथ देश के प्राचीन इतिहास, स्थापत्य से भी रूबरू हों।
यहां है विश्व धरोहर में शामिल तीन प्रतिकृति
•विश्व धरोहर में शामिल तीन स्थापत्यों की प्रतिकृति है यहां
•दुनिया के किसी और मेले में नहीं मिलता ऐसा उदाहरण
•राज्यों की सांस्कृतिक विरासत देखने की बनी अनूठी जगह
•सिक्किम ने यहां कलरफुल सिक्किम गेट बनाया। मणिपुर ने भगवान जगन्नाथ के रथ की याद में कांगल संग्थान गेट का निर्माण कराया। गुजरात ने गुजरात गली बनाई तो हिमाचल ने माहेश्वर गेट। जम्मू-कश्मीर ने शाह हमदान दरगाह की तरह का गेट बनवाकर सांप्रदायिक एकता का भी परिचय दिया।
•पूर्व का रंग महल तो पश्चिम की एलिफेंटा केव देखिए
•दक्षिण की चारमीनार तो गुजरात की गली भी बढ़ा रही रौनक
ऐसे बना इंटरनेशनल मेला
‘यहां थीम स्टेट बनने वाले राज्यों की ओर से स्थायी गेट बनवाने का मकसद अपने प्रदेश की पहचान दुनिया के सामने रखना है। इससे सूरजकुंड की अलग पहचान कायम हुई है। दुनिया में कोई और ऐसा मेला नहीं है जिसमें ऐसी परंपरा हो’।
राजेश जून, आफीसर इंचार्ज, सूरजकुंड मेला परिसर
थीम स्टेट की तरह ही मेले में कंट्री पार्टनर बनाने की शुरुआत हुई। ताकि इसको इंटरनेशनल मेले का दर्जा मिले। इसमें कामयाबी भी मिल गई। लेकिन यह निर्णय नहीं लिया जा सका है कि कंट्री पार्टनर अपना कोई गेट बनवा सकता है या नहीं।
यहां वर्ष 2009 में इजिप्ट, 2010 में तजाकिस्तान, 2011 में उज्बेकिस्तान, 2012 में थाईलैंड, 2013 में अफ्रीकन देश और 2014 में श्रीलंका को यह भूमिका मिली थी। 2015 के लिए लेबनान का चयन किया गया है।