फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: धूम्रपान से कैंसर तक का सफर, दिल्ली में बढ़े मरीज

विज्ञापन
विज्ञापन
-दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में हर महीने 800 से 1,000 मरीज पहुंच रहे, देर से अस्पताल आने पर इलाज भी हो रहा मुश्किल
विज्ञापन

नितिन राजपूत

पूर्वी दिल्ली। तंबाकू और शराब के दुष्प्रभावों से लोग भले ही परिचित हों, लेकिन इनकी लत के चलते सिर और गर्दन के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पूर्वी दिल्ली स्थित दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में हर महीने करीब 800 से 1,000 मरीज सिर और गर्दन के कैंसर का इलाज कराने पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में मरीज बीमारी बढ़ने के बाद अस्पताल पहुंचते हैं।



दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान के हेड एंड नेक सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राहुल अग्रवाल ने बताया कि शुरुआती चरण में ओरल कैंसर की पहचान होने पर कई मामलों में केवल सर्जरी से ही बेहतर उपचार संभव है। वहीं, बीमारी बढ़ जाने पर मरीज को कीमोथेरेपी, रेडिएशन और अन्य उपचारों की जरूरत पड़ सकती है।
विज्ञापन


मेहनतकश वर्ग में ज्यादा मामले



डॉक्टर के अनुसार, सिर और गर्दन का कैंसर मध्यम और निम्न आय वर्ग में अधिक देखने को मिल रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में मजदूर, ड्राइवर, दर्जी और अन्य मेहनत-मजदूरी करने वाले लोग बड़ी संख्या में हैं। काउंसलिंग के दौरान कई मरीज लंबे समय से पान मसाला, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन की बात स्वीकार करते हैं। लगातार तंबाकू के संपर्क में रहने से मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे समय के साथ कैंसर का खतरा बढ़ता है।

पिता की आदत का खामियाजा भुगती 14 साल की बच्ची



डॉ. अग्रवाल ने अपने करियर में ओरल कैंसर की सबसे कम उम्र की 14 वर्षीय मरीज का मामला भी साझा किया। उनके अनुसार, बच्ची के पिता पान मसाला खाते थे। एक बार उनके थूके हुए पान मसाले को बच्ची ने गलती से मुंह में डाल लिया। इसके बाद वह ऐसा बार-बार करने लगी। लंबे समय तक तंबाकू के संपर्क में रहने के बाद उसमें कैंसर की समस्या सामने आई।
विज्ञापन


डॉक्टरों के मुताबिक, शराब का लंबे समय तक अधिक सेवन भी सिर और गर्दन के कैंसर का प्रमुख जोखिम कारक है। तंबाकू और शराब का साथ में सेवन करने से खतरा और बढ़ सकता है।



इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

-मुंह का घाव या अल्सर ठीक न होना



-लंबे समय तक कान में दर्द रहना

-मुंह के अंदर खुरदरापन महसूस होना



-निगलने में दर्द या परेशानी

-आवाज में लगातार बदलाव



-सांस लेने में दिक्कत
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें