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नौ मुर्गियों के चलते खतरे में पड़ा किलर गैंग

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नौ मुर्गियों के चोरी की सूचना लिखाने का एक मामला इतना बड़ा हो सकता है इसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। दिल्ली कैंटोमेंट इलाके में 39 वर्षीय राकेश सिंह की पोल्ट्री फार्म है। 11 नवंबर को उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनकी नौ मुर्गियों चोरी हो गई हैं।
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रिपोर्ट लिखाने के आठ दिन बाद उनके फार्म पर कुछ गंडों ने हमला किया। इस हमले में राकेश की मौत हो गई जबकि उनके बेटे को गंभीर चोट लगी। राकेश का बेटा अभी भी दिल्ली के एलएनजीपी अस्पताल में भर्ती है।

पुलिस ने जब इस हमले की जांच शुरु की तो एक खतरनाक साजिश के साथ कांट्रैक्ट किलर के एक गैंग का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने सुपारी ले कर हत्या करने वाले इस गैंग के तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि शेष की तलाश जारी है।
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शिकायत वापस ने लेने की मिली सजा

जांच में पता चला कि पिछले साल दिसंबर में राकेश के भाई की मित्सीबुसी कार चोरी हो गई थी। चोरी की एक घटना को एक व्यक्ति ने देख लिया था। उसकी पहचान पर राकेश के भाई ने गौरव कोहली नामक व्यक्ति के खिलाफ कार चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

एक महीने बाद गौरव कोहली राकेश सिंह के भाई के घर पहुंचा और कार वापस करते हुए उसने एफआईआर वापस लेने की बात कही। राकेश के भाई ने शिकायत वापस लेने से इंकार कर दिया।

इसके बाद से ही गौरव और उसके लोग राकेश और उसके भाई के परिवार को लगातार परेशान कर रहे थे। इस दौरान राकेश और उसके भाई को जान से मारने की धमकी भी दी गई।
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राकेश की जान बचाई जा सकती थी?

धमकी के खिलाफ भी राकेश के परिवार ने पुलिस में लिखित शिकायत की और परिवार के लिए खतरे की बात पुलिस को भी बताई। लेकिन पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

राकेश सिंह ने जब 11 नवंबर को मुर्गियों के चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई तो गौरव ने राकेश की दुकान पर हमला किया और उसकी हत्या कर दी। जांच में पता चला गौरव असल में एक कांट्रैक्ट किलर है जिसपर 23 आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें से तीन हत्या के मामले हैं।

हत्या की धमकी और चोरी की शिकायत के बाद भी पुलिस की निष्क्रियता इस मामले में बेहद निराशजनक है। इस मामले में पुलिस ने अगर समय रहते ही कदम उठाए होते तो शायद राकेश की जान बचाई जा सकती थी।
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