डॉक्टरों का कहना है कि भले ही दिल्ली सरकार ने एहतियात के तौर पर ऐसा किया है, लेकिन आगे चलकर ये लोग सामाजिक भ्रांतियों के शिकार हो सकते हैं। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक पांड्या बताते हैं कि कोरोना वायरस को लेकर वैसे ही लोगों में अफवाहों का दौर चल रहा है। ऐसे में संदिग्धों के घर पर बोर्ड लगाने का मतलब है कि बाद में इन लोगों को कहीं अलग-थलग न कर दिया जाए। एम्स के डॉ. मनोज बताते हैं, जरूरी है कि सरकार को बोर्ड लगाने के अलावा ये भी जागरूकता करनी चाहिए कि क्वारंटीन के बाद ये लोग सुरक्षित हैं। इनसे घबराएं नहीं।
दिल्ली में 5 हजार घर क्वारंटीन में
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 18 से 21 मार्च के बीच दिल्ली में सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। अब तक करीब 11 हजार दिल्लीवासियों को क्वारंटीन किया जा चुका है। करीब 5 हजार घर क्वारंटीन हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह तक ये सभी लोग होम क्वारंटीन पर रहेंगे।
घबराने की नहीं है जरूरत : स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सर्विलांस टीम ने कोरोना वायरस को रोकने के लिए घरों के बाहर ये बोर्ड लगाएं हैं। इनसे घबराने की जरूरत नहीं है। हमारा सिर्फ यही उद्देश्य है कि कोरोना संदिग्ध लोगों से बाकी अलग रहें, ताकि इस वायरस को फैलने से रोका जा सके।