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जनसंख्या नियंत्रण में सिर्फ महिलाओं की है भागीदारी

Wed, 15 Jul 2015 12:58 AM IST
रश्मि ओझा/अमर उजाला, गाजियाबाद
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पूरा विश्व जनसंख्या नियंत्रण और जनसंख्या स्थिरता के लिए चिंतित हैं। केंद्र और राज्य सरकारें इसके लिए विभिन्न उपाय कर रही है।
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जगह-जगह जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं लेकिन लगता है कि इस मामले में पुरूष जागरूक नहीं हुए हैं। जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को अपनाने में अभी भी महिलाओं की ही भागीदारी सबसे अधिक है।

यूपी में एनसीआर क्षेत्र के तीन जिले गाजियाबाद, हापुड़ और नोएडा के आंकड़ों को देखकर तो ऐसा ही लगता है। लगातार प्रचार प्रसार के बावजूद शिक्षित क्षेत्र एनसीआर में भी पुरुष नसबंदी को अपनाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
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एनआरएचएम की वार्षिक रिपोर्ट कार्ड में अधिकतर पूरे प्रदेश में पुरुषों का योगदान ना के बराबर है। गाजियाबाद की तिमाही रिपोर्ट में जहां 221 महिलाओं ने नसबंदी कराई वहीं उनके सापेक्ष मात्र 13 पुरुषों ने इसे अपनाया।

वहीं गौतमबुद्धनगर में भी 368 महिलाओं के सापेक्ष मात्र 9 पुरुषों ने नसबंदी कराई। हापुड़ में पुरुष नसबंदी कराने में पीछे रहे। यहां 216 महिलाओं के मुकाबले सिर्फ 5 पुरुषों ने नसबंदी योजना का लाभ उठाया।

बुलंदशहर में पुरुष नसबंदी का हाल सबसे बुरा है। यहां 439 महिलाओं के मुकाबले महज एक पुरुष की नसबंदी हुई है।
प्रदेश के कई जिले ऐसे भी हैं जहां पुरुष नसबंदी का खाता भी नहीं खुल पाया है।

इसमें बागपत, आगरा, अंबेडकरनगर, बलिया, देवरिया सहित कई जनपद शामिल हैं। पूरे प्रदेश में एक बरेली की स्थिति सबसे अच्छी है जहां 340 पुरुषों ने नसबंदी कराई है।
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प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दो पुरुष के मुकाबले 263 महिलाओं की नसबंदी हुई है। सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल ने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए जागरूकता अभियान और कैंप आदि लगाए जाते हैं इससे पहले जनपद पुरुष नसबंदी में अव्वल भी आया था।
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