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ना जमीन पर ना आसमान में, सिर्फ दो फुट की ऐसी जगह में रहती है ये महिला, देखकर हो जाओगे हैरान

Tue, 28 Aug 2018 02:41 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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house on metro pillar - फोटो : अमर उजाला
दिलवालों की दिल्ली में ऊंची-ऊंची इमारतें भले ही शहर की संपन्नता की तस्वीर पेश करती हो लेकिन शहर में आज भी गरीब होर्डिंग पर दो फुट में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। यह बात सुनने में शायद आपको अटपटा लगे लेकिन रोहिणी सेक्टर सात में मेट्रो पिलर पर लगे होर्डिंग के पीछे की जगह हो बेघरों ने अपना आशियाना बना रखा हैं, जहां पिलर के ऊपर से तारों के सहारे ये लोग आना जाना करते हैं। पूछने पर सुनीता (बदला हुआ नाम) कहती है कि वह सिग्नल पर अपने भाई-बहनों के साथ सामान बेचती है। (सभी फोटोः अमर उजाला)
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house on metro pillar - फोटो : अमर उजाला
इस बीच चोरी होने के डर से वह अपना सामान होर्डिंग के पीछे रखती है। इतना ही नही घर के बच्चों को इन होर्डिंग्स के पीछे सुला भी देती है। कई बार तो वह खुद भी इन लोहे के पाइपों पर आराम फरमा लेती है। यह कहानी केवल सुनीता की नहीं उन तमाम बेघर लोगों की है जिनके लिए शेल्टर होम बनाने का दावा सरकार कर रही है।
साहब, फुटपाथ से लगता है डर : यह पूछे जाने पर कि रैन बसेरा में क्यों नहीं रहते? सुनीता के पिता रवि कृष्ण बताते हैं साहब, फुटपाथ से डर लगता है और रैन बसेरों में सामान चोरी हो जाता है। गंदे कंबल और ऊपर से इंचॉर्ज की डांट फटकार रैन बसेरों तक जाने को दिल नही करता। 
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house on metro pillar - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में रैन बसेरों की स्थिति: इस समय दिल्ली में कुल 184 रैन बसेरा हैं, जिनमें से 82 स्थायी और 102 अस्थायी है। नेशनल अर्बन लाइवहुड मिशन के तहत बने इन रैन बसेरों में अभी 4890 लोग रह रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशानुसार (2014) रैन बसेरा में रह रहा हर शख्स को 50 स्कायर फीट की जगह मिलनी चाहिए। वहीं, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) का दावा है कि दिल्ली में बने रैन बसेरा में कुल 14584 लोग रह सकते हैं। (यानि इनमें प्रत्येक शख्स को रहने के लिए मात्र 16 वर्ग फुट की जगह ही मिल पा रही है) ऐसे में सवाल यह उठता है कि दिल्ली में ऐसे कितने लोग हैं जो बेघर हैं। क्या उनका पर्याप्त आंकड़ा सरकार के पास है? इन बेघर लोगों के लिए सरकार क्या कर रही है?

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house on metro pillar - फोटो : अमर उजाला
एक लाख की आबादी पर होना चाहिए एक बसेरा : सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट-सीएचडी के निदेशक सुनील कुमार आलेडिया ने बताया कि हर एक लाख लोगों के बीच एक रैन बसेरा होना चाहिए जिसका एरिया कम से कम 1 हजार वर्ग फुट हो, लेकिन दिल्ली की आबादी के हिसाब से बहुत कम रैन बसेरा हैं। जब सर्दी का मौसम आता है तो सरकार को बेघर लोगों की याद आती है। गर्मी और बरसात में इन लोगों के लिए कुछ नहीं किया जाता, बल्कि इस सीजन में रुकने के लिए इन बेघरों को दस रुपये देने होते हैं।
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house on metro pillar - फोटो : अमर उजाला
जून में होती हैं सबसे ज्यादा मौतें : सीएचडी की एक रिपोर्ट के अनुसार जून माह में सबसे ज्यादा बेघरों लोगों की मौत होती है। अगर 2004 से लेकर अब तक का रिकॉर्ड देखा जाए तो जून में सबसे ज्यादा 4283 बेघरों की मौत हुई है। इससे थोड़ा सा कम आंकड़ा जुलाई महीने का है जिसमें 2004 से लेकर अब तक 3854 बेघर काल के गाल में समां चुके हैं। 1 जनवरी 2004 से 16 मई 2018 तक जारी की गई रिपोर्ट में यह पता चला कि है कि इस साल 2018 की शुरूआत से लेकर 16 मई तक दिल्ली में कुल 1102 बेघरों की मौत हुई है। 
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