house on metro pillar
- फोटो : अमर उजाला
इस बीच चोरी होने के डर से वह अपना सामान होर्डिंग के पीछे रखती है। इतना ही नही घर के बच्चों को इन होर्डिंग्स के पीछे सुला भी देती है। कई बार तो वह खुद भी इन लोहे के पाइपों पर आराम फरमा लेती है। यह कहानी केवल सुनीता की नहीं उन तमाम बेघर लोगों की है जिनके लिए शेल्टर होम बनाने का दावा सरकार कर रही है।
साहब, फुटपाथ से लगता है डर : यह पूछे जाने पर कि रैन बसेरा में क्यों नहीं रहते? सुनीता के पिता रवि कृष्ण बताते हैं साहब, फुटपाथ से डर लगता है और रैन बसेरों में सामान चोरी हो जाता है। गंदे कंबल और ऊपर से इंचॉर्ज की डांट फटकार रैन बसेरों तक जाने को दिल नही करता।