अदालत ने आईएएस प्रशिक्षु पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई बुधवार को तय की है। पूजा पर पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा, 2022 के लिए अपने आवेदन गलत तरीके से प्रस्तुत करने और तथ्यों को गलत साबित करने का आरोप है। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जंगाला ने आज मामले को स्थगित कर दिया, क्योंकि एपीपी ने इस आधार पर स्थगन मांगा था कि राज्य ने मामले पर बहस करने के लिए एसपीपी अतुल श्रीवास्तव को नियुक्त किया है।
खेडकर की ओर से पेश अधिवक्ता बीना माधवन ने अदालत को बताया कि प्रत्येक बीतते दिन के साथ आईएएस अधिकारी यूपीएससी द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का अवसर खो रही हैं। यूपीएससी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश कौशिक (शिकायतकर्ता) ने दलील को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और कहा कि जमानत याचिका पर कल एसपीपी की मौजूदगी में बहस की जाए।खेड़कर जून में अपने प्रोबेशनरी प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में पुणे कलेक्टरेट में शामिल हुईं। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने सीएसई पास करने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और बेंचमार्क विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूबीडी) के तहत कोटा का दुरुपयोग किया।
इस मामले में यूपीएससी ने खेड़कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उनका चयन रद्द करने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। उन्हें भविष्य की परीक्षाओं से भी रोक दिया गया है।
यूपीएससी द्वारा दिए गए एक सार्वजनिक बयान के अनुसार खेड़कर के दुराचार की विस्तृत और गहन जांच से पता चला कि उन्होंने अपना नाम बदलकर अपनी पहचान को गलत तरीके से पेश करके परीक्षा नियमों के तहत अनुमेय सीमा से परे धोखाधड़ी से प्रयास किए। बयान में यह भी कहा गया है कि खेड़कर ने अपने पिता और माता के नाम के साथ-साथ अपनी तस्वीर, हस्ताक्षर, ईमेल पता, मोबाइल नंबर और पता भी बदल दिया।