प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए नोएडा में पॉलीथिन पर रोक लगने जा रही है। यह प्रावधान प्राधिकरण बोर्ड से मंजूर हो गया है। सरकारी अधिसूचना जारी करने को शासन के पास भेजा जाएगा।
प्रतिबंध के बाद पॉलीथिन का इस्तेमाल करने वालों पर 5000 रुपये जुर्माना और तीन माह की सजा का प्रावधान किया गया है। दरअसल, एनजीटी भी बढ़ते प्रदूषण को लेकर गंभीर है।
नोएडा प्राधिकरण की सोमवार को हुई 187वीं बोर्ड बैठक में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे बोर्ड ने अनुमोदन कर दिया।
प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से जुर्माना
प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण ने बताया कि बैठक में नोएडा नॉन बायो गार्बेज / पॉलीथिन (कंट्रोल) बायलॉज 2015 को मंजूरी दी गई। हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, गोवा, झारखंड व उत्तर प्रदेश पॉलीथिन पर प्रतिबंध के प्रावधानों को शामिल करते हुए ड्राफ्ट तैयार किया गया है।
इसके लागू होने पर अगर कोई व्यक्ति 40 माइक्रोन तक की पॉलीथिन का पहली बार इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 5000 रुपये जुर्माना लगेगा।
इसके बाद भी अगर वह इस्तेमाल करता पाया गया तो प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से जुर्माना और तीन माह के कारावास का प्रावधान किया गया है।
नोएडा में रोजाना करीब 600 टन कूड़ा निकलता है,
इसे लागू करने के लिए अलग प्रकोष्ठ का गठन होगा, जिसे मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी देखेंगे। उनके अधीन अन्य स्टाफ होगा। पहले चरण में शहरी और उसके बाद देहात क्षेत्र में इसे लागू किया जाएगा।
नोएडा में रोजाना करीब 600 टन कूड़ा निकलता है, जिसमें से करीब 10 प्रतिशत यानी 60 टन पॉलीथिन जैसा कूड़ा होता है। डंप करने का उचित प्रबंध न होने के कारण, सीवेज, नालियों और बड़े नालों में फेंक दिए जाते हैं।
इसकी वजह से नोएडा में सीवर जाम की समस्या तेजी से बढ़ गई है। प्राधिकरण के सर्वे में भी यही बात सामने आ चुकी है। कूड़ा उठाने की डोर टू डोर योजना के साथ ही इसे भी लागू करने की तैयारी है।