प्रदूषण जांच केंद्र अब बिना जांच किए फर्जी प्रमाण-पत्र नहीं दे पाएंगे। विभाग ने जांच केंद्रों को साफ्टवेयर वाहन से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। जिले में 4 केंद्रों को जोड़कर मानीटरिंग की जा रही है। चुनाव के बाद जिले के सभी प्रदूषण जांच केंद्र को परिवहन विभाग अपने सिस्टम से जोड़ देगा।
इससे दिल्ली की तरह यहां भी फोटो युक्त प्रदूषण प्रमाण-पत्र वाहन स्वामी को मिलेगा। यूपी में गौतमबुद्घ नगर पहला जिला होगा, जिसमें ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत प्रमाण-पत्र मिल पाएगा।
जिले में 84 प्रदूषण जांच केंद्र हैं। अधिकतर खराब होने के बावजूद भी प्रमाण-पत्र बनाकर बेच रहे थे। यह बात एनजीटी टीम की जांच में पता चली। एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को सुधारा जाए। विभागीय अधिकारियों ने मामले की जानकारी शासन में दी, तो वहां से सभी केंद्रों को अपग्रेड कर उन्हें वाहन साफ्टवेयर से जोड़ने के लिए कहा गया। ताकि वह गलत तरीके से प्रमाण-पत्र न दे पाएं।
अधिकारियों ने गौतमबुद्घ नगर में 4 जांच केंद्रों को मॉडल के रूप में सॉफ्टवेयर से जोड़ा है। अब विभाग से मशीन और वाहन को फिट होने का संकेत दिया जाएगा। उसके बाद ही केंद्र से सर्टिफिकेट मिल सकेगा।