दिल्ली की जहरीली हवा को शुद्ध करने के लिए प्रदेश सरकार ने कुदरत का सहारा लिया है। बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग रेवला खानपुर और मलिकपुर इलाकों में बांस के 21,181 पौधे लगाएगा। इसके लिए विभाग ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं। वनस्पति विशेषज्ञों के मुुताबिक बांस ऐसा पौधा है, जो सबसे तेजी से ऑक्सीजन छोड़ता है और हवा में मौजूद प्रदूषक कणों जैसे पीएम2.5 और पीएम10 को सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है। नए टेंडर के लिए बोलियां 1 दिसंबर तक जमा होंगी और उसी दिन तकनीकी बोली खोली जाएगी।
बांस जितनी तेजी से बढ़ता है, उतनी ही तेजी से जहरीली हवा को भी साफ करता है। वनस्पति विशेषज्ञों के मुुताबिक इसका तना लंबा और पत्तियां हल्की होने के कारण धीमी हवा चलने पर भी ये लहलहाने लगते हैं। इसके कारण ये पीपल के पत्तों की तरह से हवा तेजी से शुद्ध करने में सक्षम हैं। ऐसे में इस पहल से पश्चिमी वन क्षेत्र रेवला खानपुर और मलिकपुर के इलाकों की हवा में सुधार आने की उम्मीद है। बांस के पौधे न केवल वायु को शुद्ध करेंगे, बल्कि मिट्टी को भी स्थिर रखकर हरित पट्टी को मजबूत बनाएंगे। इस परियोजना के अंतर्गत साल 2025-26 में पश्चिमी वन क्षेत्र में बांस की तादाद बढ़ाने की तैयारी है।
ग्रीन एयर प्यूरीफायर भी है बांस
दिल्ली में इन दिनों हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में है। कई इलाकों में एक्यूआई 400 से ऊपर दर्ज किया गया है, जबकि औद्योगिक और बाहरी इलाकों में यह गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बांस के पौधे लगातार कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं और वायु में मौजूद सूक्ष्म धूल कणों को नीचे बैठाने में मदद करते हैं। इस वजह से इन्हें ग्रीन एयर प्यूरीफायर भी कहा जाता है।
बड़े पैमाने पर बांस लगाने की योजना
वन विभाग की ओर से जारी टेंडर नोटिस के मुताबिक इस परियोजना के तहत पौधों की सिंचाई, खाद-पानी, खरपतवार नियंत्रण और सुरक्षा का काम ठेकेदार के जिम्मे रहेगा। वन विभाग के अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि अनेक प्रजातियों में यह पौधा न केवल सुंदर दिखता है, बल्कि शहर की हवा को सांस लेने लायक बनाने में अहम भूमिका निभाता है। यमुना किनारे डीडीए का बांसेरा पार्क इसकी सुंदरता का बड़ा उदाहरण है।