दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में कैद हुए वायु प्रदूषक तत्व अभी मौसम के बंधन से मुक्त ही हुए थे कि छुट्टियां बिताकर लाखों की संख्या में राष्ट्रीय राजधानी में लौटे वाहनों की चहलकदमी ने वातावरण में धूल के कणों को बढ़ा दिया है।
औद्योगिक क्षेत्रों में भी फिर से स्थिति गंभीर बन गई है। इस बात की तस्दीक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े कर रहे हैं। इससे दिल्ली-एनसीआर में कुछ स्थानों पर फिर से पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) गंभीर श्रेणी में चला गया है।
आनंद विहार में हवा की गुणवत्ता फिर से गंभीर श्रेणी (400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) के स्तर को पार कर गई। वहीं दिल्ली में आनंद विहार समेत पांच गंभीर स्तर श्रेणी वाली प्रदूषित जगहें एनएसआई द्वारका, शादीपुर, आईटीओ और दिल्ली यू्िनवर्सिटी रिकॉर्ड की गईं।
कई जगहों पर दो से चार गुना है प्रदूषण का स्तर
एनसीआर में गाजियाबाद की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। लगातार गाजियाबाद में पीएम 2.5 का स्तर 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से नीचे आने को तैयार नहीं है। पीएम 2.5 का सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
ज्यादातर जगहों पर यह दो से चार गुना ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है। एनसीआर में गाजियाबाद समेत नोएडा, हरियाणा में स्थित फरीदाबाद, राजस्थान स्थित भिवाड़ी में हवा की स्थिति बेहद खराब है।
द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) की सेंटर फॉर एनवॉयरमेंट स्टडीज की फेलो पूजा अरोड़ा का कहना है कि दिल्ली और एनसीआर की मौजूदा हवा खराब होने के पीछे चार प्रमुख वजह हैं। पहली वजह यह है कि हर ठंड में प्रदूषण बढ़ने की प्रवृत्ति है।
इस वजह से बढ़ रहा प्रदूषण
दिल्ली प्रदूषण
- फोटो : self
दूसरी हवाओं की गति बेहद धीमी है। तीसरी दिवाली के दौरान होने वाला प्रदूषण। चौथी वजह पंजाब और हरियाणा में जलाया जा रहा फसल अवशेष है जो यहां की हवा को खराब बना रहा है। अभी तक इस बात का कोई अध्ययन नहीं है कि जिससे स्पष्ट कहा जा सके कि इनमें से कौन सी वजह ज्यादा प्रदूषण फैला रही है।
हालांकि अन्य वजहें भी जिम्मेवार हैं। मसलन सड़कों पर दौड़ती (मूविंग व्हिकल) से सड़कों पर निष्क्रिय पड़ी धूल कण हवा में फैल जाती है। नमी या धुंध के कारण यह चारों ओर फैलती नहीं और धूल के कणों का एक गुबार बन जाता है।
आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, हवा में खतरनाक पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) बढ़ाने में हवा के धूल कणों की बड़ी भूमिका है। मसलन पीएम 2.5 में हवा के धूल कणों की हिस्सेदारी 38 फीसदी तो पीएम 10 में 50 फीसदी तक है।
यमुना एक्सप्रेस वे पर दिखा भयानक मंजर
- फोटो : ANI
बीते दिन छुट्टियां मनाकर दिल्ली को वापस लौट रहे लाखों लोगों की गाड़ियां यमुना एक्सप्रेस वे पर फंसी रहीं। अमर उजाला ने यह बताया था कि छुट्टियों के बाद वाहन लौटेंगे और जाम व प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है। इसका असर भी दिल्ली-एनसीआर में हवाओं पर पड़ा है। रीयल टाइम आंकड़ों में दिल्ली-एनसीआर में कई जगहों पर हवा बेहद खराब श्रेणी में है।
बहुत खराब (लाल रंग) में है इन जगहों पर हवा की गुणवत्ता
स्थान एक्यूआई
दिल्ली 306
फरीदाबाद 356
नोएडा 323
गाजियाबाद 396
कानपुर 303
लखनऊ 372
मुरादाबाद 320
नोट : यह आंकड़े सीपीसीबी ने शाम 4 बजे (बीते 24 घंटे के आधार पर जारी किए हैं। आंकड़े वायु गुणवत्ता सूचकांक की औसत स्थिति को दर्शाते हैं। रंग कोड स्थिति के हिसाब से यह आंकड़े लाल रंग यानी बहुत खराब श्रेणी में हैं। 300 से 400 के बीच एक्यूआई बहुत खराब श्रेणी को दर्शाती है।