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दिल्ली में आज से गहरा सकता है प्रदूषण का संकट, एक्यूआई में सुधार लेकिन हवा फिर भी खराब

Mon, 19 Oct 2020 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं
  • खराब हवा के साथ 254 दर्ज किया गया एक्यूआई
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हवा में जहर... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राजधानी वासियों को फिलहाल प्रदूषित हवा से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं से सोमवार से हवा की सेहत और खराब हो सकती है। रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में शनिवार के मुकाबले 33 अंकों का सुधार आया, बावजूद इसके हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई।

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इसका प्रमुख कारण पराली जलने की अधिक घटनाएं बताई जा रही हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, रविवार शाम चार बजे तक एक्यूआई 254 रहा, जबकि शनिवार को यह 287 था।

पंजाब और हरियाणा में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल पराली जलने की अधिक घटनाएं सामने आ रही हैं। इसकी प्रमुख वजह फसलों की कटाई समय से पहले होना और कोरोना के कारण मजदूरों की कमी को बताया जा रहा है। मौसम विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, रविवार को दिन में उत्तर-पश्चिम की ओर बहने वाली हवा अपने साथ पराली जलने से उत्पन्न होने वाले प्रदूषकों को ला रही हैं। 
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रात में हवा की धीमी चाल और तापमान में गिरावट की वजह से प्रदूषण के कण इकट्ठा हो रहे हैं। यही वजह है कि इन दिनों राजधानी में हवा का स्तर खराब श्रेणी में चल रहा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, शनिवार तक हरियाणा, पंजाब और इसके आसपास के इलाकों में पराली जलने की 882 घटनाएं दर्ज की गईं।

पराली जलने से जमा होने वाले पीएम 2.5 की मात्रा भी शनिवार को 19 फीसदी दर्ज की गई थी। मंत्रालय के वार्निंग सिस्टम के अनुसार, रविवार को राजधानी में प्रदूषण की मिक्सिंग गहराई और औसतन हवा की गति 12,500 घन मीटर प्रति सेकंड रही, जिससे प्रदूषक तत्वों को जमा होने में मदद मिली है। 

इस वर्ष पराली के कम जलाए जाने का अनुमान था, लेकिन अधिक मामले सामने आ रहे हैं। बिना बासमती वाली फसल किसानों के किसी के उपयोग में नहीं आती है। क्योंकि, इसकी पराली में अधिक मात्रा में सिलिका पाया जाता है। इस वजह से किसान जला देते हैं।
- प्रशांत गार्गव, सदस्य, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
 

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उत्तरी निगम ने प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ की कार्रवाई

उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने प्रदूषण के खिलाफ चालान कर एक से 16 अक्तूबर तक 38.43 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त किया। इनमें से 1702 चालान खुले में कूड़ा जलाने के किए गए हैं, जिससे निगम को 26.48 लाख रुपये का राजस्व मिला। 59 चालान धूल उड़ाने के खिलाफ किए गए हैं। इससे 12 लाख रुपये प्राप्त हुए।

इसके अलावा दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) समेत अन्य एजेंसियों के खिलाफ भी खुले में मलबा डालने को लेकर करीब 86 चालान किए हैं। इसके साथ ही उत्तरी निगम ने एजेंसियों को उनके अंतर्गत आने वाली कच्ची जगहों की सुध लेने के लिए भी कहा है, जो धूल उड़ने का कारण बनती हैं। यह सभी जगह उत्तरी निगम के दायरे में आती हैं, जिनका क्षेत्रफल करीब 16,87,413 वर्ग मीटर है।

निगम के अनुसार, धूल रोकने के लिए प्रतिदिन 134 स्प्रिंकल टैंकर से पानी का छिड़काव कराया जा रहा है, जिससे 1,340 किलोमीटर सड़क को कवर किया जा रहा है। जीपीएस युक्त 18 रोड मैकेनिकल स्वीपर से 650 किलोमीटर सड़क से मिट्टी आदि हटाई जा रही है।
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