11 फरवरी को मतदान की तिथि घोषित होते ही राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों ने जोर अजमाइश तेज कर दी है। क्षेत्र में अधिक प्रभाव दिखाने के लिए पार्टी प्रत्याशियों ने रैलियों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।
भाजपा का प्रयास है कि पीएम नरेंद्र मोदी को नोएडा लाया जाए। सपा ने सीएम अखिलेश यादव को नोएडा लाने का फिर से प्रयास शुरू कर दिए हैं। वहीं, बसपा का चाहती है कि मायावती की रैली इस बार नोएडा में कराई जाए।
दरअसल, बुधवार को जैसे ही चुनाव आयोग ने यूपी विधान सभा के चुनाव की तिथियां घोषित कीं तो यह तय हो गया कि चुनाव प्रचार का ज्यादा समय नहीं बचा है। करीब 20 दिन ही चुनाव प्रचार के लिए मिलेंगे, इतने कम समय में जिन पार्टियों के प्रत्याशी घोषित नहीं हैं, उनके लिए तो पूरे क्षेत्र में घूमना भी मुश्किल हो जाएगा।
सबसे बेहतर तरीका बचा है कि शीर्ष स्तर से नेता लाकर नोएडा में रैलियां कराई जाएं। सपा प्रत्याशी अशोक चौहान का कहना है कि उन्होंने सीएम अखिलेश यादव से पहले ही कह रखा है कि नोएडा में चुनावी रैली के लिए वक्त निकाला जाए। क्योंकि नोएडा में प्रदेश सरकार ने ढेर विकास के कार्य कराए हैं, उसका संदेश भी लोगों को सीएम से माध्यम से ही जाना चाहिए। कोशिश होगी कि सीएम के अलावा भी शीर्ष स्तर के नेता भी रैलियां करें।
बसपा प्रत्याशी रविकांत मिश्रा ने बताया कि उन्होंने पिछले दिनों बहन मायावती से मुलाकात की थी। उनसे अनुरोध किया था कि जिले की दादरी और जेवर विधान सभा में पहले ही बसपा जीतती आ रही है। नोएडा विधान सभा भी बसपा के खाते में होनी चाहिए, इसके लिए जरूरी है कि मायावती की रैली नोएडा में होनी चाहिए।
अभी तक ज्यादातर चुनाव के वक्त दादरी या जेवर में ही रैलियां होती रही हैं। सतीश मिश्रा की भी नोएडा में रैली कराई जाएगी। वहीं, भाजपा विधायक विमला बाथम ने बताया कि उनकी कोशिश होगी कि पीएम नरेंद्र मोदी और संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चुनाव बिगुल की शुरूआत नोएडा से ही करें। चूंकि इससे पहले मोदी की दो बार नोएडा में जनसभाएं हो चुकी हैं। पहला चरण यहीं से शुरू होगा और संदेश भी पूरे प्रदेश में जाएगा।