फाइनेंस कंपनी के मालिक से उगाही करने वाले गाजियाबाद-नोएडा के पुलिसकर्मियों के लिप्त होने के मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ। पुलिसकर्मियों ने पहले 50 लाख रुपये की मांग की थी।
जब उन्हें लगा कि कंपनी मालिक से 50 लाख रुपये नहीं मिल सकते तब वे 10 लाख रुपये लेने को तैयार हो गए। इतना ही नहीं पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि उगाही की पूरी प्लानिंग कंपनी मालिक के पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी अफसर) विनीत कुमार ने बनाई थी।
सेक्टर-20 थाना प्रभारी अमरनाथ यादव का कहना है कि विनीत की आरोपी पुलिसकर्मियों से दोस्ती थी। विनीत को लगता था कि रूपेश इंश्योरेंस क्लेम के नाम पर कुछ गलत काम करता है। उसके पास पैसा भी बहुत है लिहाजा उसे आसानी से चंगुल में फंसाया जा सकता है। पुलिसकर्मियों को इसका पता चलने पर ही उगाही की योजना बनाई गई।
जांच के नाम पर दो लैपटॉप और वसूले थे पौने तीन लाख
मंगलवार को रुपये लेने जैसे ही आरोपी आए, उनमें से दो को पुलिस ने दबोच लिया। जबकि उनके दो साथी मौके से भागने में कामयाब हो गए। उगाही करने सेक्टर- 4 की फाइनेंस कंपनी पहुंचे आरोपी चार पुलिसकर्मियों ने खुद को यूपी एसटीएफ की लखनऊ यूनिट से बताया था।
कंपनी मालिक रूपेश को उन्होंने बताया कि कंपनी में फर्जी तरीके से इंश्योरेंस क्लेम का काम हो रहा है। इसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी वहां से जांच के नाम पर दो लैपटॉप और 2.75 लाख रुपये लेकर चले गए।
अगले ही दिन फिर आरोपियों ने रूपेश को कॉल कर फर्जी काम करने का मामला दबाने के नाम पर 50 लाख रुपये की मांग की। काफी जद्दोजहद के बाद मामला 10 लाख रुपये पर टिक गया।
इस तरह से पकड़े गए थे वसूली करने वाले वर्दीधारी
रूपेश को जब शक हुआ कि इन पुलिसकर्मियों के संबंध यूपी एसटीएफ से नहीं हैं तब उसने इसकी सूचना पुलिस को दी। रूपेश को आरोपियों ने रुपये लेने के लिए सोमवार को आने की बात कही थी।
लेकिन वे अगले दिन आए। दो आरोपी कंपनी के अंदर रुपये लेने गए उसी दौरान पहले से ही मौजूद पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। जबकि बाहर कार में सवार उनके दो साथी कांस्टेबल नीरज राठी, राजेंद्र वहां से फरार हो गए।
एसपी सिटी दिनेश यादव के मुताबिक फरार पुलिसकर्मियों और एक अन्य की तलाश की जा रही है। मामले की गंभीरता से जांच हो रही है। विनीत की भी संलिप्तता पाई गई है। वह फरार चल रहा है। उसे भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।