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Police Preachings : बाल अपराधों पर अंकुश लगाएगी दिल्ली पुलिस की संस्कारशाला, ऐसे आयोजित होती है कार्यशाला

Sun, 08 Oct 2023 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजीव कुमार, नई दिल्ली

सार

इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने किशोरों को अपराध की दुनिया में फंसने से बचाने के लिए पहल शुरू कर दी है। बाहरी दिल्ली पुलिस ने एक अनूठी मुहिम शुरू की है। इसे संस्कारशाला नाम दिया है। 
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1 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी में नाबालिगों में बढ़ रहे अपराध की प्रवृति पुलिस के लिए सिरदर्द बनी है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने किशोरों को अपराध की दुनिया में फंसने से बचाने के लिए पहल शुरू कर दी है। बाहरी दिल्ली पुलिस ने एक अनूठी मुहिम शुरू की है। इसे संस्कारशाला नाम दिया है। 

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पुलिस का मानना है कि बचपन में ही बच्चों और किशोरों में पनप रही गलत आदतों की पहचान कर उन्हें इसके नुकसान के बारे में बताया जाए। साथ ही अपराध को लेकर मिलने वाली सजा के बारे में इन्हें जानकारी दी जाए और अपराधियों के प्रति समाज के व्यवहार के बारे में बताया जाए तो संभव है कि वह अपराध की तरफ रुख करने से बचेंगे। 

अक्सर देखा जाता है कि किशोर गलत संगत में पड़कर अपराध करते हैं। इसकी शुरुआत होती है दोस्तों के साथ पार्कों में खेलने से। वहां जाने के बाद अकसर बच्चे व किशोर गलत संगत में पड़ जाते हैं और फिर नशाखोरी, जुआ और सट्टा खेलने लगते हैं। इसके बाद शुरू होता है अपराध का सिलसिला। पहले वह छोटे मोटे अपराध करते हैं और फिर गैंग के संपर्क में आ जाते हैं। 
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ऐसे में पुलिस न केवल उन बच्चों और किशोरों को जो गलत काम कर रहे हैं बल्कि उन बच्चों और किशोरों को जो इनके आस पास रहते हैं, इनमें अच्छे संस्कार देने का फैसला किया है। बाहरी जिला की सामुदायिक पुलिस विभाग इनसे संपर्क कर इनमें अच्छे संस्कार देने की मुहिम शुरू की है। 

बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि हाल में ही शुरु मुहिम से बच्चों और किशोरों में जागरूकता आई है। उन्हें अच्छे और बुरे में फर्क महसूस होने लगा है। पुलिस अब इन बच्चों के जरिए ही ऐसे इलाकों को चिन्हित कर रही है जहां पार्कों व सुनसान जगहों पर किशोर नशाखोरी ब अन्य गलत चीजों में शामिल हैं। 

ऐसे आयोजित होती है संस्कारशाला 
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बाहरी जिला के झुग्गी वाले इलाके में स्थित पार्क में अक्सर बच्चे और किशोर नशा, जुआ और सट्टा खेलते हुए दिखते हैं। इन पार्कों में इलाके के अन्य बच्चे और किशोर होते हैं। कोई वहां खेल रहा होता है तो कोई आपस में बैठकर बातचीत कर रहा होता है। निरीक्षक मनीष मधुकर के नेतृत्व में पुलिस टीम ऐसे किसी भी पार्क में सादा वर्दी में पहुंचते हैं। 

पुलिस टीम के आने से बेखबर बच्चे और किशोर अपने काम में लगे रहते हैं। टीम सभी को एक जगह पर एकत्र करते हैं। फिर शुरू होती है संस्कारशाला। टीम इन बच्चों और किशोरों में सही गलत की समझ भरने की कोशिश में जुट जाते हैं। इन्हें इनके दुष्परिणाम बताए जाते हैं। सजा और अंधकारमय भविष्य की जानकारी दी जाती है। प्रोजेक्टर लगाकर भावनात्मक शार्ट फिल्म या वीडियो दिखाकर इन्हें संस्कारवान बनाने की कोशिश होती है। 
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4 सालों में विभिन्न अपराधों में पकड़े गए नाबालिग  
वर्ष    पकड़े नाबालिग
2023    1707
2022    3002
2021    3317
2020    2940

हत्या के मामले में पकड़े गए नाबालिग
वर्ष    पकड़े नाबालिग
2023    112
2022    152
2021    125
2020    96

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