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Delhi NCR News: दुष्कर्म मामले में जांच में लापरवाही पर पुलिस को फटकार, डीसीपी से रिपोर्ट तलब

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रोहिणी कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की व्यवस्था को किया बेनकाब
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गौरव बाजपेई
नई दिल्ली।
रोहिणी कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच व्यवस्था को बेनकाब करते हुए फटकार लगाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल कुमार ने विजय विहार थाने के दुष्कर्म मामले में पुलिस की जानबूझकर की गई लापरवाही और पूरी तरह लापरवाह रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि गंभीर बलात्कार जैसे मामले की जांच पूरी तरह लापरवाही से की गई, जिसमें जांच अधिकारी, थाना प्रभारी और सहायक पुलिस आयुक्त की निगरानी में भी बड़ी लापरवाही बरती गई।
अदालत ने आरोपी की की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि जांच अधिकारी उप निरीक्षक नेहा खत्री ने रश्मि शर्मा और उसके परिवार वालों के बयान तक दर्ज नहीं किए। जबकि इस मामले में रश्मि और आरोपी के रिश्तोें को लेकर ही शिकायत हुई है। अदालत ने कहा कि ऑडियो रिकॉर्डिंग को साबित करने के लिए आवाज के नमूने भी नहीं लिए गए, जो अदालत के पहले आदेश में साफ निर्देश दिए गए थे। गेस्ट हाउस मालिक के बयान तक नहीं लिए गए, जबकि आरोपी और शिकायतकर्ता का विवाह बीते 18 दिसंबर को तय था। अदालत ने इन खामियों को जानबूझकर की गई लापरवाही करार दिया। आरोपी की तरफ से पेश वकील रवि दराल ने अदालत को बताया कि मामला सहमति से संबंध से जुड़ा है, जिसे दो साल बाद दुष्कर्म का रूप दिया जा रहा है। विवाह की बात कही जा रही है लेकिन इस विवाह में लड़के के पिता या संबंधियों को ही नहीं आमंत्रित किया गया था। इस मामले में लड़का विवाह से चार दिन पहले फरार हो गया था।
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न्यायाधीश ने लिखा, जांच अधिकारी ने जान बूझकर की गलती


न्यायाधीश कपिल कुमार ने लिखा कि जांच अधिकारी की ओर से की गई ये खामियां जानबूझकर लगती हैं और थाना प्रभारी विजय विहार तथा संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त की निगरानी में पूरी तरह लापरवाही हुई है। अदालत ने आगे कहा कि जब मामले की जड़ में आरोपी का दो-दो संबंध था, तो अन्य लड़कियों के बयान दर्ज करना जरूरी था, लेकिन पुलिस ने इसे भी टाल दिया। अदालत ने इस गंभीर लापरवाही पर संबंधित उप पुलिस आयुक्त को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का सख्त आदेश दिया है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध की जांच कैसे इतनी लापरवाही और निगरानी अधिकारियों की पूरी लापरवाही से की गई। रिपोर्ट अगली सुनवाई 13 अप्रैल तक दाखिल करनी होगी।
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