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जल्दी में पुलिस, कहीं बीमार को उठाया तो कहीं घर में घुस अभद्रता

Fri, 02 Oct 2015 11:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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बिसाहड़ा में पशुवध के बाद मचे बवाल में हुई इकलाख की हत्या के अधिकांश आरोपियों की उम्र 18 से 20 साल के बीच है। आरोपियों के परिजनों का आरोप है कि घटना के दौरान परिवार के सदस्य घर पर सोए हुए थे।
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बवाल के बाद देर रात पुलिस आई और लड़कों को उठाकर ले गई। उनका कहना है कि एक अभियुक्त तो कई साल से दिल्ली में ही रह रहा है। रिपोर्ट में उसका नाम भी शामिल है। कई लड़के गायब हैं।

अपने बेटे के बारे में जानकारी लेने गए एक व्यक्ति की भी कोई खोज खबर नहीं है। परिवार से पैरवी करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में एक तरफा कार्रवाई से परेशान आरोपियों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस बारे में पुलिस कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
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मां-पत्नी से मारपीट कर दो युवकों को ले गए पुलिसकर्मी

गांव बिसाहडा की मिथलेश ने बताया कि उसके बेटा धीरेंद्र और लॉ स्टूडेंट रूपेंद्र घर पर मौजूद थे। जिस स्थान पर घटना हुई, वह स्थान उनके घर से काफी दूर है।

देर रात कुछ पुलिस वालों ने घर का दरवाजा खटखटाया। पूछने पर उन्होंने कहा कि दारोगा ने युवकों को पूछताछ के लिए बुलाया है। आरोप है कि विरोध करने पर पुलिसकर्मियों ने मिथलेश और उसकी  पुत्रवधु  से मारपीट और अभद्रता की और दोनों युवकों को ले गए।

पुलिस ने मामले में रूपेंद्र को गिरफ्तार दिखा दिया है जबकि धीरेंद्र तीन दिन से गायब है।

पूछताछ के नाम पर सोते हुए बीमार बेटे को उठाया

कुसुम शिशौदिया का बड़ा बेटा विशाल राणा भी मामले में नामजद है, जो काफी लंबे समय से दिल्ली में रहकर नौकरी करता है।  गांव में उसका कभी आना-जाना भी नहीं होता।

इसके बावजूद उसे हत्यारोपी बना दिया गया। उसकी बहन ने रोते हुए बताया कि घटना के दौरान 400-500 लोगों की भीड़ मौजूद थी, लेकिन आरोप उन पर थोप दिया गया। उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।

रोते हुए कुसुम शिशौदिया ने बताया कि घटना के दो घंटे बाद पुलिस ने उसके बेटे संदीप को घर पर सोते हुए उठा लिया। पुलिस को उसके बीमार होने की जानकारी दी गई, लेकिन पुलिस केवल घटना के बारे में जानकारी करने के बहाने उसे ले गए। दूसरे दिन परिवार को पता चला कि उसके बेटे का नाम भी रिपोर्ट में दर्ज है। उसके बाद बेटा वापस नहीं आया है।

भीड़ का किया दो भाइयों के सिर मढ़ा

गरिमा ने पुलिस और प्रशासन पर निर्दोष लोगों को मामले में फंसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके दो भाई गौरव और सौरभ को भीड़ की पिटाई से इकलाख की मौत मामले में आरोपी बना दिया गया, जबकि उसके भाइयों का मामले से कोई लेना-देना नहीं था।

नजदीक ही मकान है। इस रास्ते से ही आना-जाना है। पुलिस ने दोनों को घर से उठाया था। परिजनों को गुमराह कर युवकों के नाम रिपोर्ट में शामिल कराए गए हैं।

सुमित और शुभम की मां अनीता ने बताया कि उसके पति अपाहिज है। पुलिस उनके लड़कों को उठाकर ले गई थी, उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला। पुलिस के अफसर भी कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।
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छत के रास्ते पुलिस घर में घुसी

श्रीओम की बीमार मां लीला (80) ने बताया कि घटना के दौरान उसका बेटा घर पर ही था। बीमार होने के चलते श्रीओम दवा देने के लिए उन्हें बैठा रहा था।

इस दौरान मकान के बराबर में मौजूद दूसरे घर के दरवाजे को तोड़कर पुलिस छत के रास्ते घर में घुस आई और बेटे को उठाकर ले गई। इसके बाद से उसके दूसरे बेटे हरिओम का भी कहीं पता नहीं है। जिस तरह से पुलिस घर से उसके निर्दोष बेटे को उठाकर लेकर गई है वैसे ही अब उसे भी ले जाएं।

वहीं विवेक और सचिन के परिवार की हालत भी ठीक नहीं है। उनका इलेक्ट्रोनिक्स का काम हैं। वे घर की छत पर पंखे की मोटर की बाइंडिंग कर रहे थे, तभी पुलिस वहां आई और दोनों को अपने साथ ले गई।
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