राजधानी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में दो समुदायो के बीच भड़की हिंसा के मामले में पुलिस को एक बाप-बेटे की तलाश है। पुलिस को शक है कि इलाके में सांप्रदायिक तनाव के लिए ये दोनों असली जिम्मेदार हैं।
पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद से ही मोमीन सलमानी और उसका 28 साल का बेटा तारिक घर से फरार है। दोनों इलाके के नामी अपराधी हैं। दोनों की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगी हुई हैं लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला।
हालांकि अब तक दिल्ली पुलिस ने शांति भंग करने आरोप में तीन एफआईआर दर्ज की हैं और करीब 60 लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
बता दें कि तारिक को पुलिस क्राइम ब्रांच ने आखिरी बार 2012 में गिरफ्तार किया था। इसके पहले वह रॉबरी, आर्म्स एक्ट, सरकारी कर्मचारी से बदसलूकी, छिनैती समेत कई मामलों में भी आरोपी बनाया जा चुका है।
पब्लिक टॉयलेट बना मुसीबत!
मेल टुडे के अनुसार, त्रिलोकपुरी इलाके में फैली अशांति और हालात पर काबू पाने के बाद पूर्वी दिल्ली की जिला निरीक्षण शाखा ने जांच शुरू की और त्रिलोकपुरी ब्लॉक 20 के सभी स्थानीय लोगों के बयान रिकॉर्ड किए।
इस तफ्तीश के बाद पुलिस ने पाया कि पूरा मामला एक सरकारी प्लॉट पर कब्जा करने को लेकर शुरू हुआ था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि कुछ महीनों पहले एक सरकार एजेंसी ने इलाके में बने पब्लिक टॉयलेट को गिरा दिया था। इसके बाद लोगों ने वहां कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया।
कुछ दिनों बाद स्थानीय लोगों ने उसकी सफाई करके वहां बैठने के लिए एक चबूतरा बनाने का निर्णय लिया लेकिन मोमीन ने इसका विरोध किया और पूरे इलाके में हंगामा खड़ा कर दिया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मोमीन की नजर उस सरकारी जगह पर थी और वह उसे हड़पना चाहता था, लेकिन जब उसे यह पूरा होता नजर नहीं तो उसने बवाल शुरू कर दिया।
दिवाली की रात मिल गया मौका
हालांकि उस समय दोनों समुदायों के कुछ बड़े लोगों ने सबके बीच समझौता कराकर मामला रफादफा कर दिया था। कुछ ही दिनों बाद उस जगह पर एक पक्ष के लोगों ने नवरात्रि पर अच्छे से सफाई करके अस्थाई पूजा पंडाल बना दिया।
इस वजह से मोमीन को एक बार फिर बवाल करने का मौका मिल गया और उसने हंगामा शुरू कर दिया, लेकिन तब भी बड़ों ने आगे आकर मामला ठंडा करा दिया।
इसके बाद से ही मौके की तलाश में जुटे मोमीन को दिवाली की रात दो पक्षों के बीच कहासुनी की बात पता चली तो उसने अफवाहों के जरिए इसे हवा दे दी। आरोप है कि उसने अपने बेटे के साथ मिलकर पूरे इलाके में अफवाहें फैलाईं जिसके बाद दोनों समुदायों के लोग सड़क पर उतर आए।