राजधानी दिल्ली के अशोक विहार इलाके में कारोबारी के परिवार को बंधक बनाकर दो करोड़ की डकैती मामले की गुत्थी को आखिर दिल्ली पुलिस ने तीन माह बाद सुलझा ही लिया। पुलिस ने इस संबंध में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य साजिशकर्ता मिराज उर्फ मेहराज फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मंगोलपुरी, दिल्ली निवासी जितेंद्र उर्फ संजू, चामुंडा कालोनी, खड़गपुर, रेलवे फाटक उत्तराखंड निवासी छुट्टन लाल, महिपाल और सैंजनी, चंदौसी, संभल, यूपी निवासी अजय पाल के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक तमंचा व दो कारतूस बरामद किए हैं।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने वारदात में अपना हाथ होने की बात स्वीकार की। इसकी निशानदेही पर एक तमंचा व दो कारतूस बरामद हो गए। पूछताछ में जितेंद्र ने बताया कि वारदात में शामिल बाकी आरोपियों को वह सीधे तौर पर नहीं जानता है। यहां तक वह उनके नाम भी नहीं जानता था, उसे बस उनके शहरों के नाम पता थे। पुलिस ने मुरादाबाद, चंदौसी, संभल, अलीगढ़, ठाकुरद्वारा, रामपुर समेत 30 से अधिक स्थानों पर पड़ताल की। इसके बाद चार अगस्त को छुट्टन, पांच अगस्त को अजय पाल और 11 अगस्त को महिपाल को दबोच लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना हाथ होने की बात स्वीकार की। इन लोगों ने बताया कि मिराज के कहने पर वारदात को अंजाम दिया।
आरोपी एक-दूसरे को सीधे नहीं जानते थे। किसी न किसी के जरिये इनकी एक दूसरे से मुलाकात हुई थी। जितेंद्र के खिलाफ 29, छुट्टन के खिलाफ पांच, अजयपाल के खिलाफ सात और महिपाल के खिलाफ सात मामले दर्ज है। जितेंद्र मंगोलपुरी थाने का घोषित बदमाश है। इन लोगों ने लूटे गए माल से अपने मकान बनाने के अलावा बाइक व अन्य सामान खरीद लिया है।
आरोपियों ने बताया कि कई दिन योजना बनाने के बाद पीड़ित के घर की रैकी की गई। बाद में आधी रात को ग्रिल काटकर कारोबारी के घर में दाखिल होकर वारदात को अंजाम दिया गया। बाद में अजय की बहन सरोज के रघुबीर नगर स्थित घर पर माल का बंटवारा हुआ। आरोपियों ने लूटी गई रकम से मकान बनाने के अलावा खूब मौज-मस्ती की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना के बाद से बदमाशों की धरपकड़ के लिए दिल्ली पुलिस की कई टीमों को लगाया गया था। पुलिस फरार चल रहे बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।