यमुना नदी में अब मूर्ति विसर्जन संभव नहीं होगा। बुधवार को नदी के घाटों पर कुछ श्रद्घालु गणेश व मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन करने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें विसर्जन की इजाजत नहीं दी। इसको लेकर श्रद्घालुओं की पुलिस से नोकझोंक भी हुई।
हैरानी तो इस बात की है कि मौके पर तैनात कर्मी यह नहीं बता पाए कि इसके लिए वैकल्पिक इंतजाम क्या किए गए हैं। गणेश पूजा खत्म होने से पहले ही यमुना नदी किनारे विसर्जन करने पहुंचे लोगों की भीड़ देखकर पुलिस के भी हाथ-पांव फूले हैं।
आईटीओ पर सपरिवार मूर्ति लेकर पहुंचे मुकेश कुमार ने बताया कि पहले की तरह घाट पर नहीं जाने दिया गया। मुख्य सड़क पर ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया और गीता कालोनी जाकर मूर्ति विसर्जन करने को कहा। वहीं, गीता कालोनी के यमुना घाट पर भी रोका गया। वहां मौजूद पुलिसवालों ने पेट्रोल पंप के नजदीक दूसरी जगह भेजा।
कर्मी भी दिखे परेशान
यमुना नदी के किनारे इंतजाम देखने के लिए तैनात कर्मी इस बात को लेकर परेशान दिखे कि मुख्य पर्व पर किस तरह से मूर्ति विसर्जन संपन्न कराया जाएगा। इसकी एक वजह तो यह कि डीपीसीसी की तरफ से बनाए गए कृत्रिम तालाबों की लोगों को जानकारी नहीं है।
वहीं, आखिरी दिन यमुना घाट पर पहुंचने वाली भीड़ का संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। एक अधिकारी ने बताया कि इसके इंतजाम किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में एजेसियां पूरी तरह कमान संभाल लेंगी।
129 जगहों पर होगा मूर्ति विसर्जन
दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) ने मूर्ति विसर्जन के लिए 129 जगहों पर इंतजाम किए हैं। बीते सोमवार को डीपीसीसी ने लिस्ट जारी की थी। विसर्जन के बाद मूर्तियों को उठाने का जिम्मा भी एजेसियों पर ही है।
हालांकि, पूजा समितियां इस तरह के सख्त नियमों पर एतराज जता रही हैं, लेकिन डीपीसीसी ने नियमों से बदलाव करने से इंकार कर दिया है।