इस बीच एएसआई जयप्रकाश को शुक्रवार शाम को सूचना मिली कि अमरलाल सोनिया विहार, पुश्ता रोड के पास कारतूसों के साथ आने वाला है। पुलिस ने कार सवार अमरलाल को दबोच लिया। उसकी कार से 2000 कारतूस और 25 हजार रुपये बरामद हुए। आरोपी ने बताया कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों को कारतूस सप्लाई करने आया था।
मूलरूप से अबोहर (पंजाब) निवासी अमरलाल ने शुरुआत में बंदूकों की दुकान में सेल्समैन की नौकरी शुरू की थी। बाद में उसने अपनी खुद की बंदूकों की दुकान खोल ली। इसी दौरान उसका परिवार बीमारी से घिर गया, जिसमें उसका काफी पैसा लग गया। इसके बाद उसने अवैध कारतूस बेचने का धंधा शुरू किया। लगभग 20 साल से वह इस धंधे में लिप्त है। आरोपी शाहबाद, अंबाला से 125-150 रुपये में कारतूस खरीदकर आगे 200-250 रुपये में बेचता था।
हथियारों के फर्जी लाइसेंस भी बनाता था
आरोपी अमरलाल ने हथियारों के फर्जी लाइसेंस बनाने का धंधा भी शुरू किया था। इसी कड़ी में वर्ष 2002 में सीबीआई ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बाद में वह जमानत पर रिहा होकर दोबारा अवैध कारतूसों का धंधा करने लगा। इसके बाद 2011 में उसे मानसा (पंजाब) में एक बार फिर गिरफ्तार किया गया। बाद में कोतवाली फरीदकोट पुलिस ने अवैध कारतूस बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया।
वैध गन हाउस वाले उपलब्ध कराते थे कारतूस
छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि अमरपाल को वैध गन हाउस वाले ही कारतूस उपलब्ध कराते थे। जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि गन हाउस के मालिक जिन लोगों के वैध लाइसेंस होते हैं, लेकिन वह अपने कोटे के कारतूस हर साल नहीं खरीदते हैं, उनके कोटे के कारतूस अवैध तरीके से इन हथियारों के सप्लायरों को बेच देते हैं। ऐसे में गन हाउस वालों व इन्हें खरीदकर बेचने वाले लोगों को मोटा मुनाफा होता है।