गुड़गांव पुलिस आयुक्त के तबादले के बाद खाली पद से जिले के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बिना पुलिस आयुक्त के लोगों की सुनवाई तक नहीं हो पा रही है। इससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। दस दिनों से बिना कप्तान चल रही सुरक्षा व्यवस्था से लोग भी असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।
गुड़गांव पुलिस कमिशभनरी में पुराने पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल ने अपनी नियुक्ति के बाद जनता से सीधा जुड़ उनकी समस्याओं सुनने के लिए जनता दरबार शुरू किया था। इसमें रोजाना औसतन 125 शिकायतें आती थीं। पुलिस आयुक्त के सीधे आदेश के चलते थानों-चौकियों में भी इसका असर दिखना शुरू हुआ लेकिन तीन नवंबर को पुलिस आयुक्त मित्तल के तबादले के बाद से अब तक पुलिस आयुक्त की सीट खाली ही पड़ी है।
नई नियुक्ति नहीं होने से हालांकि संयुक्त पुलिस आयुक्त विवेक शर्मा को वैकल्पिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। यही कारण है कि फरियादियों का तुरंत निवारण होने की जगह फिर से लोगों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सोहना से आए फरियादी सुल्तान सिंह ने बताया कि पिछले पांच दिनों से वह चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी शिकायत को सुना भी नहीं जा रहा। उनके अनुसार रोजाना उनकी तरह काफी संख्या में शिकायतकर्ता निराश लौट रहे है।
धर्मसागर, चेयरमैन, फोरवा
दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र होने के नाते गुड़गांव बेहद संवेदनशील है। सरकार को यहां पुलिस आयुक्त के तबादले से पहले ही व्यवस्था कर देनी चाहिए थी। जनता की बात नहीं सुनी जाने से जनता का पुलिस के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।
आरएस राठी, अध्यक्ष, गुड़गांव सिटीजन काउंसिल
गुड़गांव जनता के हितों को देखते हुए सरकार को जल्द से जल्द नए अधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए। इससे शहर में सुरक्षा बंदोबस्त भी बढ़ेंगे साथ ही जनता भी अपने आपको सुरक्षित महसूस करेगी।
प्रदीप यादव, अध्यक्ष, गुड़गांव उद्योग एसोसिएशन
औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने अतिरिक्त इंतजाम किए हुए थे। इंडस्ट्री के लोग पुलिस आयुक्त से सीधी मांग कर लिया करते थे। पुलिस आयुक्त के न होने से अब काफी परेशानी हो रही है।
दिल्ली से सटा है शहर फिर भी अनदेखी
प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गुड़गांव में पुलिस कमिशभनरी बनने के बाद से कई पुलिस आयुक्त बदले जा चुके है।
दिल्ली समेत कई राज्यों की सीमाओं के सटे होने के चलते यहां पर पुलिस आयुक्त के ट्रांसफर के बाद एक-दो दिनों में ही नए आयुक्त की नियुक्ति हो जाती है। विधानसभा चुनाव के ठीक बाद गुड़गांव के पुलिस आयुक्त के ट्रांसफर के दस दिन बाद भी अबतक किसी को भी कमान नहीं सौंपी गई है।
दिल्ली समेत कई जिलों की सीमाएं लगने के चलते गुड़गांव की सुरक्षा को लेकर पुलिस का खास ध्यान रहता है। गुड़गांव में रोजाना वीवीआईपी मूवमेंट के अलावा कई बड़े आयोजनों को लेकर पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
प्रदेश में बीजेपी की सरकार में गुड़गांव से मंत्री भी यही है। हाल ही में गुड़गांव में नॉर्थ ईस्ट युवकों के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद भी गृह मंत्रालय ने पुलिस सुरक्षा में चौकसी बरतने का आदेश दिया था। इसे लेकर पुलिस भी बेहद सर्तकता बरत रही थी।
तीन नवंबर को जारी हुई आईपीएस की लिस्ट के बाद गुड़गांव पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल के ट्रांसफर के दौरान फरीदाबाद समेत कई जिलों से आईजी समेत पुलिस आयुक्त का ट्रांसफर किया गया था। लेकिन गुड़गांव के अलावा लगभग सभी स्थानों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई। फोरवा के चेयरमैन धर्मसागर का कहना है कि गुड़गांव शहर की अनदेखा की जा रही है।