नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट ने एक चिकित्सा में लापरवाही के मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया। कोर्ट ने मामले की गहन जांच के लिए पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को आदेश दिया। यह मामला सपना जैन नामक महिला की शिकायत से जुड़ा है। पीड़िता सपना ने 12 अगस्त 2017 को फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग के खिलाफ नवजात बच्चे के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था।
पीड़िता ने शिकायत में कहा था कि अयोग्य डॉक्टरों की गलतियों और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के कारण बच्चे को गंभीर क्षति हुई जिससे उसे सेरेब्रल पाल्सी और मिर्गी हो गई। इसके परिणामस्वरूप बच्चा स्थायी रूप से वनस्पति अवस्था में चला गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट गौरव कटारिया ने शिकायतकर्ता के वकील सचिन जैन की दलीलों को सुनने के बाद पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को नाकाम पाया। अदालत ने कहा कि जांच में कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित छोड़ दिए गए, जैसे कि क्या एक डॉक्टर कानूनी रूप से खुद को नियोनेटोलॉजिस्ट या सुपर-स्पेशलिस्ट बता सकता है और क्या केवल एमबीबीएस डिग्री वाला डॉक्टर खुद को विशेषज्ञ कह सकता है। अदालत ने इन बिंदुओं पर विस्तृत जांच के लिए डीसीपी को निर्देश दिए हैं, ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके। संवाद