उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे से जुडे़ एक मामले में 15 आरोपियों को 18 हजार पन्नों के आरोपपत्र की हार्ड कॉपी देने के जिला अदालत के आदेश को दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पुलिस ने याचिका में इस आदेश को रद्द करने की मांग की है। कड़कड़डूमा जिला अदालत ने एक दिन के भीतर आरोप पत्र की प्रतियां सभी आरोपियों को मुहैया करवाने का निर्देश मंगलवार को भी दिया था।
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की एकल पीठ के समक्ष दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने यह याचिका दायर की है। याचिका पर पीठ 6 नवंबर को सुनवाई करेगी। याचिका में पुलिस ने मांग की है कि कड़कड़डूमा कोर्ट की ओर से 21 सितंबर और 21 अक्तूबर को जारी आदेशों को रद्द किया जाए। कोर्ट ने कहा था कि सभी 15 आरोपियों को आरोपपत्र की हार्ड कॉपी पुलिस मुहैया करवाए।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि आरोपपत्र 18 हजार पन्नों का है और आरोपियों को देने के लिए 16 पेन ड्राइव तैयार करके निचली अदालत को सौंप दी गई हैं। संपूर्ण आरोपपत्र की हार्ड कॉपी तैयार करवाने के लिए दिल्ली पुलिस के पास पैसा नहीं है। इसलिए पुलिस ने हार्ड कॉपी तैयार करवाने के लिए दिल्ली सरकार से पैसा लेने के लिए 15 दिन का समय मांगा था, लेकिन अदालत ने समय देने से इनकार कर दिया।
पुलिस के वकील ने कहा कि अगर आरोपियों को हार्ड कॉपी नहीं दी जाती तो इसमें न्याय की अवहेलना वाली कोई बात नहीं है। उन्होंने आरोपियों को सॉफ्ट कॉपी देने के लिए अदालत को पेन ड्राइव सौंप दी हैं।