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सॉफ्टवेयर से बंद कर देते थे सेंसर और जीपीएस, इस जुगाड़ से उड़ा चुके हैं 300 से अधिक कार

Sat, 14 Jul 2018 10:43 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,गाजियाबाद
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पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अतंर्राष्ट्रीय गिरोह के दो सदस्यों ने बताया कि वह केवल औजारों के बल पर ही वाहन चुराते थे। उनके गैंग का एक सदस्य साइबर एक्सपर्ट है। वह लैपटॉप का प्रयोग करता है। लैपटॉप में जीपीएस को डी-एक्टिवेट करने का सॉफ्टवेयर रखता है। उसकी मदद से गाड़ियों के आसानी जीपीएस और सेंसर बंद कर देता था।

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एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि गैंग के सदस्यों ने अपने काम बांट रखे हैं। कुछ सदस्य गाड़ियों को चुराने का काम करते हैं। इसके अलावा बाकी सदस्यों का काम गाड़ियों को नेपाल और भूटान ले जाकर बेचने का है। इसके अलावा गैंग का एक सदस्य गाड़ियों में लगे सेंसर और जीपीआरएस सिस्टम को तोड़ने में माहिर है। हालांकि गैंग के ज्यादातर सदस्य कम पढ़े लिखे हैं। बावजूद इसके उन्हें सिस्टम को ब्रेक करने की पूरी जानकारी है। 

वह सबसे पहले गाड़ी का शीशा तोड़कर उसका हॉर्न बंद कर देते थे। इसके कारण कोई आवाज नहीं आती है। यह गैंग रोजाना संभल से गाजियाबाद, नोएडा, गुरूग्राम, फरीदाबाद और दिल्ली आकर वाहन चुराता है। मुरादाबाद में जाकर गैराज में खड़ा करता हैं, जहां अन्य सदस्य गाड़ियों के चेसिस और इंजन नंबर बदल देते हैं। गैंग 300 से अधिक कारें चुरा चुका है, जिनमें से 100 को नेपाल में बेचा गया है। लोनी इंस्पेक्टर का कहना है कि पुलिस फरार बदमाशों की तलाश में जुटी है।

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पुलिस से बचने के लिए व्हॉट्सएप कालिंग करता था गिरोह
एसएसपी का कहना है कि आरोपी पुलिस से बचने के लिए आपस में वाई-फाई का प्रयोग करते थे। व्हॉट्सएप पर कालिंग और चेट करते हैं। पुलिस ट्रेस न कर पाए इसलिए ऐसा करते हैं। नफीस दिसंबर 2017 में साहिबाबाद थाने से जेल जा चुका है। पुलिस ने उस समय भी कई लग्जरी कार बरामद की थीं। पुलिस ने बरामद हुई छह कारों को दिल्ली से कनेक्ट कर लिया है। 

आन डिमांड उठाते थे गाड़ियां
लोनी इंस्पेक्टर उदय पांडेय ने बताया कि दोनों बदमाश क्षतिग्रस्त कार को खरीदने वाले लोगों से भी जुड़े हैं। वह क्षतिग्रस्त कार के हिसाब से आरोपी ऑन डिमांड कार चोरी करते थे। बाद में उसी कार के चेसिस और इंजन नंबर को क्षतिग्रस्त से बदल देते थे। पुलिस इस मामले में आरटीओ विभाग की भी मिलीभगत मान रही है। 

नेपाल और भूटान में आसानी से मिलते थे खरीददार
आरोपियों ने बताया नेपाल और भूटान में आसानी से खरीदार मिल जाते थे। भारत से ज्यादा मुनाफा विदेशों में कार बेचने में होता था। एक सेकेंड हेंड कार पर उन्हें एक लाख रुपये तक बच जाते थे, जिसको सभी आरोपी आपस में बांट लेते थे।
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