दूध में मिलावट और वसा समेत जरूरी तत्वों को गायब करने का गोरखधंधा बदस्तूर जारी है। जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि निरीक्षण विभाग की जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बीते वित्तीय वर्ष में दूध के 51 नमूनों में से 20 फेल पाए गए हैं।
इनमें दूध में डिटरजेंट की मिलावट के अलावा वसा और सॉलिड नॉट फैट जैसे जरूरी तत्वों की कमी पाई गई। जिला अभिहित अधिकारी विनीत कुमार ने बताया कि अप्रैल 2014 से मार्च 2015 में पैकेट बंद और खुले दूध के 75 नमूने लखनऊ जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें 51 की रिपोर्ट मिली है।
अमूल के पैकेट बंद दूध में कोलकाता की लैब ने डिटरजेंट की पुष्टि की थी। अन्य कंपनियों और खुले दूध में वसा और सॉलिड नॉट फैट की कमी पाई गई। दूध से बने उत्पादों का भी यहीं हाल है।
तीन महीने बाद आती है रिपोर्ट
कंपनियों और डेयरी मालिकों के खिलाफ कार्रवाई कर जुर्माना किया गया। बीते वित्तीय वर्ष में खाद्य पदार्थों के 348 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें 229 की रिपोर्ट मिली है। इनमें से 109 नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई है। यह नमूने दूध के अलावा, दाल, मसाले, मिठाइयों, दूध से बने उत्पादों, बर्गर, तेल आदि के थे।
लखनऊ की लैब से रिपोर्ट आने में तीन माह तक का समय लग जाता है जबकि नियम है कि नमूने मिलने के 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट भेज देनी चाहिए। इस कारण मिलावट खोरों के खिलाफ कार्रवाई में देरी होती है।
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश की सरकारी लैबों में खाद्य पदार्थों में पेस्टीसाइड यानी कीटनाशकों की मौजूदगी की पेस्टीसाइड रेजीडूअल जांच की व्यवस्था नहीं है। यदि इस जांच की व्यवस्था हो जाए तो सॉफ्ट ड्रिंक में भी गड़बड़ी का पता चल सकेगा।