यूरोपियन मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक पीएम2.5 के संपर्क में रहने से गठिया का खतरा 12 से 18 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ये सूक्ष्म कण फेफड़ों से खून में पहुंचकर पूरे शरीर के साथ खासकर जोड़ों में सूजन फैलाते हैं।
सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अरविंद मेहरा ने बताया कि नवंबर के पहले हफ्ते से ही उनके पास पुराने गठिया के मरीज आ रहे हैं। दर्द इतना तेज हो रहा है कि कई लोग रात में नींद भी नहीं ले पा रहे। ठंड मांसपेशियों को सख्त कर देती है और पीएम2.5 सूजन को बढ़ाता है।
वहीं, रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. साइमन थॉमस ने बताया कि उन्होंने देखा है कि घुटना-कूल्हा बदलवाने के बाद भी जिन मरीजों का घर प्रदूषित इलाके में है, उनकी रिकवरी धीमी होती है और दर्द बार-बार लौटकर आता है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दिल्ली की हवा साफ नहीं होगी, जोड़ों का दर्द लाखों लोगों का स्थायी मेहमान बना रहेगा।