इसी साल जुलाई महीने में जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा था। उन्होंने कहा था कि वे चिकित्सा सलाह का पालन करते हुए और स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने के लिए, भारत के उपराष्ट्रपति पद से, संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अंतर्गत, तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे रहे हैं।
धनखड़ ने अपनी चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिपरिषद का भी शुक्रिया जताया था। उन्होंने कहा था, "जब मैं इस प्रतिष्ठित पद को छोड़ रहा हूं, तो मैं भारत के वैश्विक उत्थान और उसकी अद्भुत उपलब्धियों पर गर्व से भर जाता हूं, और उसके उज्ज्वल भविष्य में मेरी पूर्ण आस्था है।"
भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यकाल आमतौर पर शपथग्रहण के बाद से पांच साल की अवधि का होता है। हालांकि, इस दौरान वे कभी भी राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए अपना पद छोड़ सकते हैं।
हालांकि, जब उपराष्ट्रपति का पद उनके इस्तीफे, मृत्यु या किसी अन्य कारण से खाली होता है तो इस पद को भरने के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराया जाना जरूरी होता है। इस चुनाव में जो भी उपराष्ट्रपति चुना जाता, वह पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए पद संभालता है। भारत में जगदीप धनखड़ से पहले सिर्फ दो उपराष्ट्रपति ही अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इनमें एक नाम है देश के तीसरे उपराष्ट्रपति वराहगिरी वेंकट गिरी (वीवी गिरी) का, वहीं दूसरा नाम कृष्ण कांत का है जिनका कार्यकाल के बीच में ही निधन हो गया था।