प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के हर घर में तो किसी न किसी रूप में गीता विराजमान है ही, साथ ही यह दुनिया में भी कई रूप में मौजूद है। इस्कॉन के संस्थापक अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार गांधी जी को गीता और सत्याग्रह प्रिय रहे वैसे ही स्वामी जी के लिए भी गीता प्रिय रही है और मानव मुक्ति का साधन बनी है।
स्वामी जी ने इस्कॉन जैसा एक अभियान छेड़ा जिसने दुनिया को भगवान कृष्ण और गीता से अवगत कराया और भगवान कृष्ण के दिव्यज्ञान को पूरे संसार तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि हम जब भी अर्जुन की तरह दोराहे पर हों तो गीता हमें सही मार्ग दिखाती है। दुनिया में जो परेशानी चल रही है उसका हल भारतीय दर्शन में है।
उन्होंने कहा कि हमारा सर्वश्रेष्ठ दुनिया के सामने आना अभी बाकी है। गीता ने सबको लोकहित में काम करने का मार्ग दिखाया है। गीता हजारों सालों से प्रासंगिक है और भविष्य में भी इसकी प्रासंगिकता निश्चित ही बनी रहेगी। गीता और उपनिषदों से बढ़कर कोई अध्ययन हितकर नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा सरकार के हर फैसले में न्याय समभाव रखने की कोशिश रहती है। मेरा आप सभी से अनुरोध रहेगा कि आप भी प्रयासों को गति दें। गीता को दुनिया के लिए सबसे बड़ा पुरस्भकार बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धर्मग्रंथ ही नहीं बल्कि जीवनग्रंथ है।
बता दें कि भगवान श्रीकृष्ण के संदेशों को विश्वभर में फैलाने के उद्देश्य के तौर पर इस ग्रंथ का अनावरण किया गया है। विश्व की इस सबसे बड़ी गीता को बनाने में लगभग डेढ़ करोड़ रुपयों का खर्च आया है। इसे इटली के इस्कॉन में बनाया गया है। इसे पहली बार पिछले साल 11 नवंबर को इटली में प्रदर्शित किया गया था।