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पीएम मोदी ने किया दुनिया की सबसे बड़ी गीता का विमोचन, कहा- भारतीय दर्शन में विश्व की हर समस्या का हल

Tue, 26 Feb 2019 04:52 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : डीडी न्यूज
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली के पूर्वी कैलाश स्थित इस्कॉन मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी श्रीमद्भागवत गीता का विमोचन किया। खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री ने यहां आने के लिए मेट्रो का प्रयोग किया। प्रधानमंत्री की मेट्रो यात्रा के दौरान उनके सहयात्रियों ने उनसे मुलाकात की और सेल्फी लीं। 

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इस्कॉन मंदिर में प्रधानमंत्री ने श्रीमद्भागवत गीता की आरती उतारी और फिर उसके पन्ने पलटकर विमोचन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर का भ्रमण किया और मंदिर में मौजूद लोगों को संबोधित किया। बता दें कि विश्व की इस सबसे बड़ी गीता का वजन 800 किलोग्राम है। 

प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। आज सुबह ही मैंने गांधी शांति पुरस्कार में हिस्सा लिया और आज मुझे गीता के भव्यतम रूप का अनावरण करने का मौका मिला। इसके लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं क्योंकि इससे और अधिक लोगों तक भगवान कृष्ण का दिव्यज्ञान पहुंचेगा।'
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उन्होंने आगे कहा, लोकमान्य तिलक ने जेल में रहकर भी गीता लिखी थी। तिलक ने लिखा था कि इसके संदेश का प्रभाव सिर्फ दार्शनिक या विद्वान लोगों के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गीता की एक प्रति मैंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी दी थी।

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'हजारों साल से प्रासंगिक है गीता का ज्ञान'

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के हर घर में तो किसी न किसी रूप में गीता विराजमान है ही, साथ ही यह दुनिया में भी कई रूप में मौजूद है। इस्कॉन के संस्थापक अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार गांधी जी को गीता और सत्याग्रह प्रिय रहे वैसे ही स्वामी जी के लिए भी गीता प्रिय रही है और मानव मुक्ति का साधन बनी है।

स्वामी जी ने इस्कॉन जैसा एक अभियान छेड़ा जिसने दुनिया को भगवान कृष्ण और गीता से अवगत कराया और भगवान कृष्ण के दिव्यज्ञान को पूरे संसार तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि हम जब भी अर्जुन की तरह दोराहे पर हों तो गीता हमें सही मार्ग दिखाती है। दुनिया में जो परेशानी चल रही है उसका हल भारतीय दर्शन में है।

उन्होंने कहा कि हमारा सर्वश्रेष्ठ दुनिया के सामने आना अभी बाकी है। गीता ने सबको लोकहित में काम करने का मार्ग दिखाया है। गीता हजारों सालों से प्रासंगिक है और भविष्य में भी इसकी प्रासंगिकता निश्चित ही बनी रहेगी। गीता और उपनिषदों से बढ़कर कोई अध्ययन हितकर नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा सरकार के हर फैसले में न्याय समभाव रखने की कोशिश रहती है। मेरा आप सभी से अनुरोध रहेगा कि आप भी प्रयासों को गति दें। गीता को दुनिया के लिए सबसे बड़ा पुरस्भकार बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धर्मग्रंथ ही नहीं बल्कि जीवनग्रंथ है। 

बता दें कि भगवान श्रीकृष्ण के संदेशों को विश्वभर में फैलाने के उद्देश्य के तौर पर इस ग्रंथ का अनावरण किया गया है। विश्व की इस सबसे बड़ी गीता को बनाने में लगभग डेढ़ करोड़ रुपयों का खर्च आया है। इसे इटली के इस्कॉन में बनाया गया है। इसे पहली बार पिछले साल 11 नवंबर को इटली में प्रदर्शित किया गया था।
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