तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का पत्र दिल्ली की जनता को वितरित करने के खिलाफ अब बवाल खड़ा होने लगा है।
एक ओर जहां केजरीवाल की रिहाई के लिए आम आदमी पार्टी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है वहीं, दूसरी ओर आप कार्यकर्ताओं की ओर से घर-घर बांटे जा रहे पत्रों पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
बता दें कि, केजरीवाल को बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी के खिलाफ मानहानि के मामले बेल बांड न भरने के चलते 6 जून तक के लिए जेल भेजा गया है।
'AAP की वेबसाइट पर भी लगे रोक'
जस्टिस बीडी अहमद और एस मृदुल की खंडपीठ में दायर जनहित याचिका में अधिवक्ता विवेक नारायण शर्मा ने इससे पहले भी आम आदमी पार्टी की वेबसाइट को ब्लॉक करने की भी मांग की थी।
हालांकि कोर्ट ने आज मामले की सुनवाई खारिज करते हुए कहा कि खंडपीठ में इसकी सुनवाई 28 मई को होगी। केजरीवाल के पत्र पर रोक लगाने के लिए याचिका में इस बात पर जो दिया गया है कि पत्र के जरिए लोगों को कानून का पालन करने के प्रति उकसाया जा रहा है।
इस मसले पर मामूली बहस के दौरान खंडपीठ ने कहा कि यह एक स्वतंत्र देश है और आम आदमी पार्टी के पत्र व वेबसाइट पर रोक लगाना लोकतंत्र के खिलाफ है।
ये है केजरीवाल की चिट्ठी
याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी देश की जनता को संविधान और कानून के खिलाफ खड़ा कर रही है।
साथ ही यह भी कहा कि ऐसा करना देश के हित में नहीं है। इससे देश में अराजकता और अस्थिरता का माहौल पनपेगा, जिसका असर इसके विकास और शांति पर पड़ेगा। याचिका में यह भी कहा गया कि केजरीवाल का पत्र न्यायपालिका के लिए भी मानहानिकारक और तिरस्कारपूर्ण है।
केजरीवाल ने तिहाड़ जेल से लिखी चिट्ठी में बीजेपी नेता नितिन गडकरी को भ्रष्टाचारी करार देते हुए खुद के बेल बांड न भरने के फैसले को सही करार दिया है। इस पत्र को पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को बांट रहे हैं।