काफी लंबे इंतजार के बाद अब प्लास्टिक कार्ड की आरसी का रास्ता लगभग साफ हो गया है। सब कुछ ठीक रहा तो प्लास्टिक कार्ड की (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) आरसी जल्द ही वाहन स्वामियों के हाथ में होगी। हालांकि इस बार की आरसी में चिप नहीं होगी। सभी जानकारी प्लास्टिक कार्ड पर लिखकर दी जाएंगी। शासन में आरसी को लेकर जल्द ही निर्देश परिवहन विभाग को दे दिए जाएंगे और उसके बाद नए साल में आरसी प्लास्टिक कार्ड में मिलेगी।
दरअसल, साल-2014 से नोएडा में दिल्ली की तर्ज पर प्लास्टिक कार्ड में चिप लगी आरसी देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन साल-2015 तक आरसी और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट दोनों टेंडर की भेंट चढ़ गए जिसमें कई अधिकारियों को तबादले का दंश भी झेलना पड़ा था।
इस कारण नोएडा वासियों को दिल्ली की तरह आरसी मिलने का मामला लटक गया। अब एक बार फिर इसको लेकर शासन में गहमा-गहमी शुरू हो गई है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चिप लगी आरसी की जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि जब तक चिप को लेकर बात साफ नहीं होती है तब तक लोगों को साधारण प्लास्टिक कार्ड की आरसी मुहैया कराई जाए। अधिकारियों की माने तो 2019 तक यह वाहन स्वामियों को मिलना शुरू हो जाएगी। हालांकि 20 से 40 रुपये अधिक अदा करने होंगे।
क्या था चिप वाली आरसी में
चिप वाली आरसी में अधिकारी अपने उपकरण से आरसी को स्कैन करते तो वाहन और उसके स्वामी की सारी जानकारी उपलब्ध हो जाती। इसके अलावा आरसी को साथ रखने की जरूरत भी नहीं थी। ऑनलाइन ही आरसी की पूरी सूचना प्राप्त हो जाती। लेकिन बिना चिप वाले प्लास्टिक कार्ड पर पूरा विवरण होगा और उसे पर्स में रखकर वाहन स्वामी चल सकेंगे।
क्या था मामला
2014-15 में स्मार्ट चिप से लैस प्लास्टिक कार्ड की आरसी व हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट दोनों को लेकर टेंडर मांगे गए थे। लेकिन कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने के कारण टेंडर की कीमत अधिक रखी गई थी। जिस कारण योजना का क्रियान्वयन नहीं किया जा सका। चूंकि ठेकेदारों ने आरसी और नंबर प्लेट दोनों की कीमत महंगी रखी थी। वाहन स्वामियों को अधिक खर्च वहन करना पड़ता। इसलिए स्मार्ट आरसी और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का मामला वहीं का वहीं ठप हो गया।
विवादों के कारण चिप वाली आरसी नहीं बनाई जा सकी थी। लेकिन अब शासन में इस बात पर विचार चल रहा है कि बिना चिप वाली आरसी बनाई जाए। इसका खर्च 20 से 40 रुपये बढ़ेगा। जिसे वाहन स्वामियों को वहन करना होगा। नए साल से यह मिलना शुरू हो जाएगा।
-एके पांडेय, एआरटीओ प्रशासन, गौतमबुद्धनगर