महत्वपूर्ण बिंदु
-बच्चों को कुपोषण से बचाने और शिक्षा से जोड़ने के मकसद से मिड-डे-मील में अब लंच के साथ नाश्ता भी देने का सुझाव है।
-यूजीसी को भंग करते हुए एक रेगुलेटर बनाने की सिफारिश है। यूजीसी की बजाय हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (एचईसीआई) एक्ट-2018 बनाया जाए।
-अंग्रेजी भाषा विदेशी भाषा या एलिट क्लास है। बेहतर भविष्य के लिए अंग्रेजी जरूरी है, लेकिन सभी भारतीय भाषाओं को भी स्कूल व उच्च शिक्षा में शामिल करें।
-थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले में संस्कृत के साथ तीन भारतीय भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी। यह अनिवार्य रहेगा, जबकि इलेक्टिव में विदेशी भाषा की पढ़ाई की जा सकती है।
-नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से सभी प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जाएं। कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर जोर दिया जाए।
-भारतीय समेत शास्त्रीय भाषाओं में कोर्स उपलब्ध करने पर जोर दिया। इसके अलावा संस्कृत की पढ़ाई करवाने पर सरकार आर्थिक रूप से मदद करेगी।
-कमेटी ने न्यू एपेक्स एजुकेशनल बॉडी बनाने का सुझाव दिया है। इसका राष्ट्रीय शिक्षा आयोग नाम रखा जाएगा। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करें, इस आयोग का काम देश की शिक्षा में सुधार और योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी होगी।
-मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया जाए। इसका काम शिक्षा और सीखने पर जोर होना चाहिए।
-स्टेट स्कूल रेगुलेटरी अथॉरिटी का निर्माण किया जाए। इसका काम राज्यों की शिक्षा व्यवस्था, फीस, शिक्षकों व गुणवत्ता पर नजर रखना होगा। इसमें तीन साल में बदलाव किया जाए।
-नेशनल स्कॉलरशिप फंड ईजाद हो, ताकि छात्रों को शिक्षा में आगे बढ़ने का मौका मिले। इसके अलावा गरीब छात्रों को फीस माफी मिले।
-एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित किताबों में बदलाव किया जाए। अगले साल तक नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क-0ण्2020 लागू होना चाहिए।