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भरे दफ्तर में जीडीए के बाबू को पीटा, लहूलुहान हालत में जान बचाकर भागना पड़ा थाने

Sat, 01 Jun 2019 03:48 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद

सार

-साथियों ने बचाकर पहुंचाया थाने, दुकान की फाइल को लेकर हुआ था विवाद
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सांकेतिक चित्र
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विस्तार
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भरे दफ्तर में जीडीए के बाबू को दबंगों ने जमकर पीटा और मोबाइल से सिर फोड़ दिया। लहूलुहान हालत में कार्यालय के कर्मचारी और अन्य लोग पीड़ित को थाने लेकर पहुंचे। दोनों आरोपियों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बताया कि दुकान की फाइल को लेकर विवाद हुआ था। पहले आरोपियों ने फोन से गाली गलौज की थी, फिर दफ्तर में आकर पीटना शुरू कर दिया।

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कृष्ण कांत राजन पुत्र रामरक्षा प्रसाद निवासी केबी-122 जीडीए स्टाफ क्वार्टर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के कामर्शियल डिपार्टमेंट में कनिष्ठ लिपिक हैं। उन्होंने थाने में तहरीर देकर बताया कि धीरज त्यागी, नीरज त्यागी प्रापर्टी डीलर हैं। मकनपुर में रहते हैं। न्याय खंड इंदिरापुरम में दुकान है। कुछ दिन पहले उन्होंने एक दुकान नाम कराने के लिए फाइल दी थी। दुकान हरिशरण सिंह के नाम से है और फाइल उन्होंने हरिशरण सिंह त्यागी के नाम से दी थी।

उस फाइल में हरिशण सिंह को हरिशरण सिंह त्यागी दर्शाना चाहे रहे थे। जो नियम के खिलाफ था। दोनों को नियम के तहत फाइल पूरी करने का आश्वासन दिया गया था। बताया कि शुक्रवार को दोनों ने पहले उनके साथ फोन पर गाली-गलौज की। उसके बाद वह दफ्तर आ गए। आते ही फाइलें उठाकर फेंक दी और गाली-गलौज, मारपीट शुरू कर दी। आरोप लगाया कि दोनों ने मोबाइल फोन से 12 से 15 बार सिर पर वार किया, जिससे वह लहूलुहान हो गए।
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पीटता देखकर आसपास में काम कर रहे बाबू दौड़कर आए। उन्होंने कृष्णकांत को बचाया। आरोपियों ने वहां से भागने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारियों ने उन्हें भी पकड़ लिया। इसी दौरान सूचना पर पुलिस मौके पर आ गई। पुलिस दोनों आरोपी नीरज त्यागी और धीरज त्यागी को सिहानीगेट थाने ले आए। सिहानीगेट थाना प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि कनिष्ठ लिपिक की तहरीर पर नीरज त्यागी, धीरज त्यागी के खिलाफ मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचा, धमकी देने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

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लीगल सेल को ट्रांसफर कर चुके थे मामला
लिपिक ने बताया कि अप्रैल में इन्होंने फाइल दी और लगातार गलत तरीके से फाइल को पास करने के लिए दबाव बना रहे थे। बताया कि फाइल न करने पर वह पहले भी कई बार धमकी दे चुके हैं। बताया कि उनकी फाइल को करने के बाद लीगल सेल के लिए ट्रांसफर कर दिया गया था। हमारे पास से फाइल जा चुकी थी। उसके बावजूद दबाव बना रहे थे। उन्होंने बता दिया गया था कि जल्द ही उनकी फाइल हो जाएगी, लेकिन फाइल पूरी होने के लिए नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेंगी।

प्लानिंग के तहत आए थे आरोपी
जीडीए के कर्मचारियों ने बताया कि दोनों आरोपी मारपीट करने की प्लानिंग से आए थे। उन्होंने आते ही फाइल फेंककर मारपीट शुरू कर दी। बताया कि दोनों ने हाथ में मोबाइल लेकर लगातार सिर पर वार किए। अगर, लिपिक को कर्मचारी नहीं बचाते तो वह हत्या भी कर सकते थे। 

मारपीट केदौरान मच गई भगदड़
लिपिक से मारपीट के दौरान जीडीए दफ्तर में भगदड़ मच गई। कुछ लोग दफ्तर से बाहर निकलकर भागने लगे। तो कुछ लोग इस डर की वजह से नहीं बोले की आरोपी उनपर हमलावर न हो जाएं। वहां मौजूद एक दो लिपिक शुरू में पीटता देखते रहे। बाद में कई अन्य लोग आने के बाद उन्हें बचाया गया। सूत्रों का कहना है कि शुरू में ही अन्य लिपिक बचा लेते तो इतनी मारपीट नहीं होती।

कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे जीडीए कर्मचारी
कनिष्ठ लिपिक के साथ मारपीट होने के बाद जीडीए के कर्मचारी सिहानीगेट थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यह दोनों आरोपी आए दिन जीडीए में कर्मचारियों को धमकाते हैं। आए दिन कोई न कोई काम लेकर आते हैं। सभी कर्मचारी इनसे त्रस्त हैं।
 
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