दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) कबूतरों के दानागाह पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो फुटपाथ, गोल चक्कर और सड़क-चौराहों पर पाए जाने वाले इस तरह के स्थल जल्द ही बंद हो सकते हैं। कनॉट प्लेस, बाराखंभा, मंडी हाउस, पटेल नगर, शंकर रोड, मंदिर मार्ग, कड़कड़डूमा व करोलबाग के न्यू रोहतक रोड समेत कई इलाकों में चौक-चौराहों पर कबूतरों के दानागाह हैं। हालांकि, लोग इस बात से अंजान हैं कि ये हादसे का कारण भी बन सकते हैं। शंकर रोड के पास तालकटोरा चौराहे पर चलते यातायात के बीच जैसे ही कोई हॉर्न बजता है तो यह कबूतर अचानक से उड़ जाते हैं। कबूतरों की अधिक संख्या होने के चलते कई बार वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ने लगता है। खासतौर पर दोपहिया वाहन चालकों को इस समस्या से ज्यादा जूझना पड़ता है।
कबूतरों की बीट से होने वाली बीमारियों से बचाएगी एमसीडी
एमसीडी कबूतरों की बीट से उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य खतरों से नागरिकों को बचाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करेगी। इसके अंतर्गत फुटपाथों, गोलचक्करों और चौराहों पर स्थित कबूतरों के दाना खिलाने के स्थलों पर प्रतिबंध लगाने और वहां दाना डालने की गतिविधि पर रोक लगाने की योजना बनाई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य शहर के नागरिकों को उन रोगों से बचाना है जो कबूतरों की बीट के कारण उत्पन्न हो सकते हैं।
एमसीडी के अनुसार, एक रिपोर्ट में कबूतरों की बीट से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का खुलासा हुआ, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया है। एमसीडी के अंतर्गत आने वाले चांदनी चौक, मोरी गेट, कश्मीरी गेट, पहाड़गंज, जामा मस्जिद आदि कबूतरों को दाना खिलाने के प्रमुख स्थानों के रूप में प्रसिद्ध हैं। इन स्थलों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग धार्मिक विश्वासों या आस्था के कारण कबूतरों को दाना डालते हैं। साथ ही, इन स्थानों पर दाना बेचने वाले विक्रेता भी मौजूद रहते हैं, जो लोगों को इन गतिविधियों में प्रोत्साहित करते हैं।
एमसीडी के मुताबिक इस योजना के अंतर्गत जल्द ही दाना खिलाने वाले स्थलों का सर्वेक्षण किया जाएगा और इसके बाद उन्हें बंद करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इस अभियान के लिए एक सलाह भी जारी की जाएगी, ताकि लोग इन स्वास्थ्य खतरों से अवगत हो सकें और अपनी सुरक्षा के लिए कबूतरों को दाना खिलाने से बचें। इन स्थानों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है।