पितृपक्ष 28 सितंबर से शुरू हो रहा है। करीब दो सप्ताह तक चलने वाले श्राद्ध मास की अमावस्या तक पितृ पृथ्वी पर वास करेंगे। इन 15 दिनों तक पितरों को प्रसन्न करने के लिए उन्हें यज्ञ, जल से तर्पण दिया जाएगा।
पंडितों का कहना है कि श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होकर आयु, आरोग्य, समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार श्राद्ध केे तीन देवता वसु, रुद्र और आदित्य हैं।
श्राद्ध के दौरान सभी शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। पंडित दुलीदत्त कौशिक का कहना है कि इन दिनों देव की बजाय पितृ की पूजा की जाती है, िजसके विशेष लाभ मिलते हैं।
माना जाता हैं कि इस दिनों पितृ धरती पर होते हैं। इसी वजह से श्राद्ध के दिनों देव की बजाय पितृ पूजा व तर्पण किया जाता है।
ऐसे करें श्राद्ध
पं देवेंद्र शास्त्री ने बताया कि पितृेश्वरों के नाम पर पिंडदान, श्राद्ध, तर्पण श्रद्धा के साथ देना श्राद्ध है। भोजन का पहला ग्रास गाय, कौआ को निकालना चाहिए और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। पितृ पक्ष में प्रतिदिन ठाकुर जी का भोग लगाकर गौ-ग्रास निकालना और श्राद्ध की तिथि को गौ ग्रास के अलावा कुत्ता, कौआ, मछली का भी ग्रास निकालना चाहिए।
पितृ पक्ष में यह न करें
श्राद्धों में दिन में सोना, झूठ बोलना, सिर और शरीर पर तेल, साबुन, इत्र आदि का प्रयोग और मदिरा के साथ ही लहसुन प्याज का सेवन भी वर्जित किया गया है। इसके साथ ही जुआ खेलना, झगड़ा, किसी भी जीवधारी को कष्ट नहीं देना चाहिए।
बाजारों में पसरेगा सन्नाटा
बाजारों में सन्नाटा रहेगा। रोजमर्रा के खानपान के सामान के अलावा इस अवधि में लोग नए सामान को खरीदने से परहेज करते हैं। वैशाली सेक्टर-4 के दुकानदार विकास ने बताया कि श्राद्ध के दौरान दशहरा और दिवाली की बिक्री के लिए अन्य इंतजामों को दुरुस्त करते हैं।
जल के पास करें स्मरण
पंडित गिरीश मिश्रा ने बताया कि पितृ तर्पण के लिए कौवे न मिलें तो नदी या घाट किनारे या छत पर किसी जल से भरे पात्र के पास कौवों का स्मरण कर उनके नाम पर ग्रास निकाल दें।