बल्लभगढ़ में पिलर बॉक्स घोटाले में निलंबित सात अधिकारियों को फिर से ड्यूटी पर लाने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
ये अधिकारी अपने राजनीतिक आकाओं के यहां हाजिरी लगा रहे हैं। इन आरोपी अधिकारियों को फरीदाबाद, गुड़गांव, रेवाड़ी और हिसार से अलग कहीं और लगाया जा सकता है।
वहीं दूसरी ओर बिजली निगम की ही विजिलेंस विंग ने प्रबंधन की इस कोशिश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं।
विजिलेंस विंग चाहती है कि पिलर बॉक्स घोटाले में निलंबित किए गए अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। विंग ने इसके लिए दलील दी है कि जब घोटाले के अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश जारी हो सकते हैं। तो इन सात अधिकारियों को क्यों बचाया जा रहा है। आरोपियों पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
हालांकि निगम प्रबंधन का कहना है कि अधिकारियों का तुरंत प्रभाव से निलंबन किया गया। इसके अलावा अगर दोबारा नियुक्ति होगी तो उन्हें प्रमोशन नहीं मिलेगा।
गौरतलब है कि 26 जुलाई को घोटाले की पहली रिपोर्ट जारी होने के बाद दिल्ली में बैठने वाले चीफ इंजीनियर सुभाष देशवाल, एसई सर्किल, एक्सईएन एनआईटी और ओल्ड फरीदाबाद समेत तीन अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही निगम प्रबंधन पर इन अधिकारियों को बचाने के आरोप लगते रहे हैं।
बिजली निगम के विजिलेंस महानिदेशक मनिंदर सिंह मान ने बताया कि आरोपों से घिरे अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करवाने की जगह उनकी दोबारा तैनाती की कोशिश करना गलत है। इस बारे में प्रबंधन से बात की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो इसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।