निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की फांसी को उम्रकैद में बदलने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई को अब एक दिन शेष है। मंगलवार को आने वाले फैसले को लेकर डासना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद सुरेंद्र कोली की बेचैनी भी बढ़ गई है।
उधर, जेल प्रशासन ने भी बैरक के बाहर न केवल सुरक्षा कड़ी कर दी है, बल्कि उसकी निगरानी भी बढ़ा दी है। उधर, बैरक में बंद सुरेंद्र कोली ने रविवार को कई जेल अफसरों से यह पूछा कि ‘हाईकोर्ट उसकेमामले में क्या निर्णय दे सकती है।’
जेल प्रशासन का कहना है कि कोली पूरी तरह से सामान्य है। उधर सूत्र बताते हैं कि तारीख का दिन करीब आने के साथ ही कोली ने खाना भी कम कर दिया है।
बैरक में भी ज्यादातर समय वह महात्मा गांधी की आत्मकथा और गीता पढ़ने के साथ-साथ अपने केस से संबंधित दस्तावेजों को भी पढ़ रहा है।
सुरेंद्र कोली की दया याचिका राष्ट्रपति के यहां से खारिज होने के बाद गाजियाबाद स्थित सीबीआई विशेष न्यायाधीश एके गुप्ता ने उसके डेथ वारंट जारी कर दिए थे।
इसी के साथ न केवल मेरठ जेल में फांसी के इंतजाम शुरू कर दिए गए थे, बल्कि कोली को भी गाजियाबाद से मेरठ जेल शिफ्ट कर दिया गया था। कोली को फांसी लग पाती इससे पूर्व ही पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिव राइट (पीडीयूआर) ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन फाइल कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट से रिव्यू पिटीशन खारिज होने के साथ ही इसी संस्था ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह कहते हुए जनहित याचिका दाखिल की कि कोली को फांसी की सजा सुनाए तीन साल तीन माह से ज्यादा हो चुका है, ऐसे में उसकी सजा को उम्रकैद में तब्दील किया जाए। हाईकोर्ट में दाखिल इस जनहित याचिका पर मंगलवार 25 नवंबर को सुनवाई होनी है।