‘हिंदू-मुस्लिम एकता को बनाए रखने के लिए संतों को अपनी जिम्मेदारी का बोध होना चाहिए। आतंकवादियों और अपराधियों की पहचान धर्म के नाम पर न करके व्यक्ति विशेष के रूप में की जानी चाहिए।’
यह कहना है कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् का। वह सोमवार को मसूरी में मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. यामीन चौधरी के आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि समाज के प्रबुद्ध वर्ग को आगे आकर समृद्ध और विकसित समाज की स्थापना करके स्वास्थ्य व उन्नति शील राष्ट्र के निर्माण में सहयोग करना चाहिए।
उनका कहना था कि अब संतों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी यह भी आ चुकी है कि वे समाज में एकता और भाईचारे का पैगाम फैलाएं। उन्होंने कहा कि अपराध का कोई धर्म नहीं होता और किसी भी संप्रदाय पर कीचड़ उछालने की धर्म में इजाजत नहीं है।
एक सवाल के जवाब में प्रमोद कृष्णम् ने कहा कि उन पर हमले की धमकी देने वाले कौन थे, इस बात का खुलासा तो जांच एजेंसी ही करेगी, वह तो सिर्फ इतना कह सकते हैं कि धमकी देने वाले राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ मिले हुए हैं।