तीन बार अदालती कार्यवाही में बाधा डालने के मामले में फंसे अधिवक्ता
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक वकील पर तीन बार अदालती कार्यवाही में बाधा डालने के लिए हाइब्रिड या वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) मोड के माध्यम से उपस्थित होने पर एक महीने की अवधि के लिए रोक लगा दी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि वकील जो अपने घर से पेश हो रहा थे और वीडियो भी चालू कर रहे थे। इस दौरान वह अदालत की मर्यादा का पालन नहीं कर रहे थे। निर्देश दिया कि एक महीने की अवधि के लिए आईटी टीम और रजिस्ट्री यह सुनिश्चित करेगी कि वकील को हाइब्रिड या वीसी सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं है।
अमित शाह से मुलाकात का आश्वासन देकर ठगी के आरोपी को नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत
उच्च न्यायालय ने रेलवे के एक ठेके के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कराने का झूठा आश्वासन देकर एक व्यापारी से दो करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए ऐसे संवैधानिक अधिकारियों के नामों का इस्तेमाल करना अपराध की गंभीरता को बढ़ा देता है। ऐसे में आरोपी अनीश बंसल को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने कहा इसके अलावा यह अदालत यह भी गौर करती है कि आरोपी लोगों ने शिकायतकर्ता को बड़ी रकम देने के लिए प्रेरित करने की खातिर केंद्रीय गृह मंत्री के नाम का इस्तेमाल किया है। जबकि वह अच्छी तरह जानते थे कि पीड़ित को दिया जा रहा आश्वासन झूठा है। यह आरोप अपराध की गंभीरता को बढ़ा देता है कि शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए ऐसे संवैधानिक प्राधिकारी और उनके परिवार के नामों का इस्तेमाल किया गया।
पीएफआई के दो नेताओं की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार
उच्च न्यायालय ने धनशोधन के एक मामले में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो नेताओं की अंतरिम जमानत याचिका पर फिलहाल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा उन्हें इस मामले में निचली अदालत के आदेश का इंतजार करना चाहिए। पीएफआई की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद और कार्यालय सचिव अब्दुल मुकीत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मामले में इस आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की थी कि एजेंसी (ईडी) गिरफ्तारी से बाद 60 दिनों की निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पायी है और यह अवधि 21 नवंबर, 2022 को पूरी हो गयी थी। उनके वकील मुजीब उर रहमान ने उच्च न्यायालय में कहा कि 17 दिसंबर, 2022 को वे (उनके मुवक्किल) वैधानिक जमानत पाने के वास्ते निचली अदालत गये थे।