प्रदूषण पैदा करने वाले ईंधन (पेट्रोल व डीजल) से चलने वाली बसों को 1 नवंबर 2026 से राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बुधवार को निर्देश दिया कि सिर्फ सीएनजी, बिजली या नवीनतम बीएस-6 डीजल जैसे स्वच्छ ईंधन पर चलने वाली बसों को ही प्रवेश मिलेगा।
यह आदेश दिल्ली में पंजीकृत बसों को छोड़कर दिल्ली में प्रवेश करने वाली सभी बसों पर लागू होगा, जिनमें अखिल भारतीय पर्यटक परमिट, अनुबंध गाड़ी, संस्थागत और स्कूल बस परमिट के तहत चलने वाली बसें शामिल हैं।
सीएक्यूएम ने दिल्ली के परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को सीमा प्रवेश बिंदुओं पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली और आरएफआईडी का इस्तेमाल कर इस निर्देश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। अन्य राज्य सरकारों को भी कहा गया है कि वे सभी बस मालिकों और कंपनियों को नए नियम के बारे में पहले ही सूचित कर दें।
आयोग ने कहा कि दूसरे राज्यों से आने वाली पुरानी और प्रदूषणकारी बसें दिल्ली के वायु प्रदूषण में इजाफा करती हैं। हालांकि अब स्वच्छ ईंधन वाली बसें आम हो गई हैं, लेकिन राजधानी में आने वाली कई बसें अभी भी अस्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करती हैं। आयोग ने पहले हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को 2024 के मध्य या 2025 की शुरुआत तक स्वच्छ ईंधन वाली बसों पर स्विच करने को कहा था। हालांकि, कई ने इसका पालन नहीं किया।
एक जनवरी से कैब एग्रीगेटर्स, डिलीवरी फर्मों में कोई नया पेट्रोल या डीजल वाहन नहीं : सीएक्यूएम
एक जनवरी से ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों को सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल करना होगा। वायु प्रदूषण को कम करने और दिल्ली-एनसीआर में गतिशीलता के स्वच्छ साधनों को तेजी से अपनाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने यह आदेश दिया है। यह आदेश विशेष रूप से मोटर वाहन एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए है।
बुधवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार चार पहिया हल्के वाणिज्यिक वाहनों (एलसीवी), 4-व्हीलर हल्के माल वाहनों (एलजीवी) (एन1 श्रेणी, 3.5 टन तक) और 2-व्हीलर के मौजूदा बेड़े में पूरी तरह से डीजल या पेट्रोल पर चलने वाले कोई भी पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाहन शामिल नहीं किए जाएंगे।
सीएक्यूएम ने आदेश दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) और एनसीआर राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी मोटर वाहन एग्रीगेटर, डिलीवरी सेवा प्रदाता व ई-कॉमर्स संस्थाएं आयोग के इन निर्देशों का अनुपालन करें। निर्देशों की प्रभावी निगरानी और कार्यान्वयन के लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को एक वेब पोर्टल विकसित करने का निर्देश दिया गया है, जैसा कि परिवहन विभाग ने पहले ही विकसित किया हुआ है।