स्थायी समिति की मंजूरी के बिना पांच करोड़ से अधिक के बजट वाले प्रस्तावों पर अमल नहीं हो सकता। यही कारण है कि एमसीडी के विभिन्न विभागों के महत्वपूर्ण कार्य कूड़ा प्रबंधन, स्वास्थ्य, पार्किंग, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पूरी तरह रुक गए थे।
एमसीडी की स्थायी समिति के गठन से 250 से अधिक परियोजनाएं धरातल पर उतर सकेंगी। ये परियोजनाएं ढाई साल से लटकीं हैं। स्थायी समिति की मंजूरी के बिना पांच करोड़ से अधिक के बजट वाले प्रस्तावों पर अमल नहीं हो सकता। यही कारण है कि एमसीडी के विभिन्न विभागों के महत्वपूर्ण कार्य कूड़ा प्रबंधन, स्वास्थ्य, पार्किंग, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पूरी तरह रुक गए थे।
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एमसीडी के अनुसार, हरी नगर में 384 बसों की क्षमता वाला मल्टीलेवल बस पार्किंग प्रोजेक्ट तैयार है। इससे निचले तल पर बस पार्किंग और ऊपर के तल पर दो लाख वर्ग फीट का व्यावसायिक क्षेत्र विकसित किया जाना है। यह प्रस्ताव लंबे समय से समिति की मंजूरी का इंतजार कर रहा था।
इसी तरह, पंजाबी बाग में एक और मल्टीलेवल पार्किंग, शाहजहानाबाद में संग्रहालय और इंटरप्रिटेशन सेंटर और तिमारपुर के बालक राम अस्पताल में 200 बेड वाले वार्ड का प्रस्ताव भी अटका हुआ था। इसी तरह स्वास्थ्य और शैक्षिक सुविधाओं से जुड़ी अस्पतालों के उन्नयन और स्कूलों के लिए स्मार्ट क्लासरूम आदि योजनाएं भी समिति गठन न होने के कारण शुरू नहीं हो सकीं।
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एमसीडी ने ठोस कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए ओखला, घोंडा डेयरी और गाजीपुर में 750 मीट्रिक टन क्षमता के बायो-सीएनजी संयंत्र लगाने की योजना बनाई है। साथ ही, नरेला-बवाना में 3,600 टीपीडी और गाजीपुर में 1,300 टीपीडी क्षमता के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की भी योजना बना रखी है।
इन योजनाओं को भी अब समिति की स्वीकृति मिलने के बाद बल मिलेगा। स्थायी समिति के गठन के बाद उम्मीद की जा रही है कि इन सभी लंबित योजनाओं को तेजी से मंजूरी मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि समिति के गठन से न केवल प्रशासनिक जड़ता टूटेगी, बल्कि नागरिक सुविधाओं के स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।