हाईकोर्ट ने छात्राओं के छात्रावास संबंधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर जामिया प्रशासन से 30 जुलाई तक जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास में कई मनमाने व भेदभावपूर्ण नियम थोपे गए हैं। उन्हें विरोध करने का भी अधिकार नहीं है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ ने अधिवक्ता चयनिका देवी की जनहित याचिका पर कहा कि छात्राओं पर इस तरह नियम थोपा जाना पूरी तरह अनुचित है।
याचिका पर जिरह में अधिवक्ता सुमन चौहान ने कहा कि छात्राएं गलत नियमों का विरोध न कर पाएं, इसके लिए छात्रावास आवेदन पत्र में पूरी तरह मनमाने व भेदभावपूर्ण नियम लगाए गए हैं। यह नियम बालिग छात्राओं के जीवन की स्वतंत्रता व स्वायत्तता को बाधित करते हैं।
याचिका के मुताबिक, जामिया के वर्ष 2018-19 के छात्रावास आवेदन पत्र में कहा गया है कि छात्रा अपने छात्रावास के किसी नियम या उपनियम का विरोध करती है या किसी हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लेती है तो उसका आवंटन फौरन रद्द कर दिया जाएगा।