फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला छात्रावास के नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती, जामिया प्रशासन को 30 जुलाई तक देना है जवाब मांगा

Sun, 08 Jul 2018 10:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने छात्राओं के छात्रावास संबंधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर जामिया प्रशासन से 30 जुलाई तक जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास में कई मनमाने व भेदभावपूर्ण नियम थोपे गए हैं। उन्हें विरोध करने का भी अधिकार नहीं है।
विज्ञापन


कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ ने अधिवक्ता चयनिका देवी की जनहित याचिका पर कहा कि छात्राओं पर इस तरह नियम थोपा जाना पूरी तरह अनुचित है। 

याचिका पर जिरह में अधिवक्ता सुमन चौहान ने कहा कि छात्राएं गलत नियमों का विरोध न कर पाएं, इसके लिए छात्रावास आवेदन पत्र में पूरी तरह मनमाने व भेदभावपूर्ण नियम लगाए गए हैं। यह नियम बालिग छात्राओं के जीवन की स्वतंत्रता व स्वायत्तता को बाधित करते हैं।
विज्ञापन


याचिका के मुताबिक, जामिया के वर्ष 2018-19 के छात्रावास आवेदन पत्र में कहा गया है कि छात्रा अपने छात्रावास के किसी नियम या उपनियम का विरोध करती है या किसी हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लेती है तो उसका आवंटन फौरन रद्द कर दिया जाएगा। 
विज्ञापन

बता दें कि छात्राओं के विरोध के बाद छात्रावास में आने-जाने का समय रात्रि 8 बजे से बढ़ाकर साढ़े दस बजे कर दिया गया था। छात्राओं का कहना है कि वह रात को छात्रावास से बाहर रहना चाहती हैं तो इसके लिए उनके पिता को वार्डन को मोबाइल पर मैसेज करना होगा।

इससे पहले छात्राओं को अपने स्थानीय अभिभावक से फार्म भरवाकर देना होता था। छात्राओं का कहना था कि यह नियम उन्हें सूचना दिए बिना, बिना किसी नोटिस के उन पर थोपे गए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें