जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय हिंसा की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने की मांग वाली याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक अन्य याचिका दायर की गई। इस याचिका पर आठ मई को सुनवाई होगी।
मालूम हो कि दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर के अंदर घुसकर हालात को काबू में किया था, जिसका जमकर विरोध हुआ।
इसके बाद अधिवक्ता नबीला हसन ने एक याचिका दायर कर क्रूरतापूर्वक हमला करने के लिए पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा और अगली सुनवाई के लिए जुलाई की तारीख दी थी।
इसी याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए आज एक नई याचिका दायर की गई है, जिसपर शुक्रवार को सुनवाई होगी। मुख्य याचिका में यह भी कहा गया था कि पुलिस ने अत्यधिक अर्धसैनिक बलों के साथ विश्वविद्यालय में घुसकर छात्रों के साथ क्रूर बर्ताव किया था।
इस पर जल्द सुनवाई के लिए अधिवक्ता स्नेहा मुखर्जी और सिद्धार्थ सीम ने आज याचिका दायर की है। उन्होंने अपनी याचिका में लिखा है कि सरकार ने कोरोना महामारी के कारण 24 मार्च से देश भर में पूर्ण लॉकडाउन घोषित कर दिया है। इस दौरान किसी को भी आवाजाही की अनुमति नहीं है।
इसके बावजूद जामिया के कई छात्रों को पुलिस स्टेशन और क्राइम ब्रांच द्वारा बुलाकर पूछताछ की जा रही है। याचिका में कहा गया है कि जांच के नाम पर पुलिस छात्रों को कई घंटों तक बिठाकर रखती है। देश में मौजूदा हालातों के बावजूद पुलिस छात्रों का उत्पीड़न कर रही है।
वर्तमान याचिका के अलावा पहले भी वकीलों, जामिया के छात्रों, ओखला (जहां विश्वविद्यालय स्थित है) के निवासियों और जामा मस्जिद के इमाम द्वारा याचिकाएं दायर की गई थीं। उन याचिकाओं में चिकित्सा उपचार और छात्रों के लिए मुआवजे और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने सहित कार्रवाई की मांग की थी।