आम्रपाली समूह के खिलाफ बैंकों के अलावा अलग-अलग निजी कंपनियां भी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) का दरवाजा खटखटाने पहुंचने लगी हैं। मामले में जेके लक्ष्मी सीमेंट की ओर से एक नई याचिका दायर की गई है। दायर याचिका के तहत इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्टसी कोड (आईबीसी) के सेक्शन-9 के तहत प्रक्रिया चलाने की अपील की गई है।
यह मामला बैंकों से इतर ऑपरेशनल क्रेडिटर के तहत आता है, क्योंकि जेके लक्ष्मी सीमेंट ने याचिका दायर की है। इस कंपनी ने आम्रपाली के लिए सप्लाई का काम किया है। इसके बकाये का भुगतान न हो पाने की सूरत में कंपनी ने एनसीएलटी में याचिका दायर की है। आम्रपाली लेजर वैली के नाम से ग्रेटर नोएडा के टेकजोन-4 में जीएच-2 प्रोजेक्ट चल रहा है।
इसमें सैकड़ों निवेशकों ने फ्लैट खरीदने के लिए निवेश कर रखा है। इस प्रोजेक्ट का एरिया 3,96,124 वर्गमीटर है और इस पर निवेशकों का करीब 400 करोड़ रुपये बकाया है। फिलहाल, यह प्रोजेक्ट अधूरा है और इसके निवेशक रोजाना धरना प्रदर्शन के लिए मजबूर हैं।
पहले से ही तीन कंपनियों पर संकट
इससे पहले बैंक ऑफ बड़ौदा ने पहले ही फाइनेंशियल क्रेडिटर के तहत आम्रपाली समूह की तीन कंपनियों आम्रपाली सिलिकॉन सिटी प्राइवेट लिमिटेड, अल्ट्रा होम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और आम्रपाली इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट पर एनसीएलटी में याचिका दायर की है। इसकी सुनवाई के बाद प्रिंसिपल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में बैंक का आम्रपाली समूह पर 195 करोड़ रुपये का बकाया है।
फैसला आने के बाद यह तय होगा कि इस मामले में इंटरिम रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) की नियुक्ति होगी या नहीं। अगर आईआरपी की नियुक्ति हो जाती है तो उक्त कंपनियों का बोर्ड भंग हो जाएगा और आईआरपी ही सर्वेसर्वा होगा और उसे 270 दिनों का समय मिलेगा, जिसमें उक्त कंपनी को उबारने का काम होगा।