पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद भी सरकार ने सबक नहीं लिया। वर्तमान में भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और अन्य संवेदनशील स्थानों के नक्शे गूगल पर ऑनलाइन देखे जा सकते है। उक्त आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
याची ने कहा कि देश हित में गूगल को इन सभी संवेदनशील स्थानों के नक्शे हटाने का निर्देश दिया जाए। अदालत ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर विचार कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता लोकेश कुमार शर्मा के उस तर्क को फिलहाल खारिज कर दिया कि गूगल को याचिका के निपटारे तक संवेदनशील प्रतिष्ठानों और रक्षा प्रतिष्ठानों के उपलब्ध नक्शे दिखाने पर रोक लगाई जाए।
गूगल देता है पूरी जानकारी
अदालत ने केंद्र सकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन को याचिका में लगाए गए आरोपों पर विचार कर जवाब देने को कहा है। अदालत ने मामले की सुनवाई 24 फरवरी तय की है।
याची की ओर से पेश अधिवक्ता सी मोहन राव ने कहा कि गूगल भारत के संवेदनशील स्थानों की पूरी जानकारी देता है। गूगल पर सड़कों, गलियों, जलमार्ग, नदियों, नहरों, सीवेज लाइनों, इमारतों की दूरी, लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई सहित भवनों आदि हर मिनट की सटीक जानकारी है।
यह सब आम जनता को जानकारी देने की आड़ में किया जा रहा है। जानकारी गलत हाथों में जाने से काफी नुकसान हो सकता है। याची ने याचिका के साथ पठानकोट एयरबेस व आसपास के क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी संलग्न की है।
पठानकोट एयर फोर्स स्टेशन पर दो जनवरी को आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गूगल को संवेदनशील प्रतिष्ठानों के नक्शे दिखाने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की सीमा से लगे तिब्बत में चार से अधिक हवाईअड्डों का निर्माण कर लिया है लेकिन गूगल पर एक भी एयरबेस नहीं दिखाया गया था। दूसरी ओर उत्तर पूर्व में भारतीय वायु सेना स्टेशनों, हवाईअड्डों की पूरी जानकारी है।